education

बारिश के पानी से रहें सावधान, लेप्टोस्पायरोसिस का बढ़ा खतरा

लगातार हो रही बारिश के कारण महाराष्ट्र के कई शहरों में जलभराव की स्थिति बन गई है। ऐसे में दूषित पानी के संपर्क से फैलने वाली गंभीर संक्रामक बीमारी लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर जिन लोगों के पैरों या शरीर पर कट, घाव या खरोंच हो, उन्हें जमा पानी में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

Priyanka Gaikwad19 जुल. 2026, 06:31 PM IST
खबर शेयर करें:
बारिश के पानी से रहें सावधान, लेप्टोस्पायरोसिस का बढ़ा खतरा
कल्याण:  लगातार बारिश के दौरान सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में पानी जमा हो जाता है। यह पानी चूहों, कुत्तों, मवेशियों और अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित हो सकता है। ऐसे पानी में लेप्टोस्पायरा (Leptospira) नामक बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यदि कोई व्यक्ति इस दूषित पानी के संपर्क में आता है, तो त्वचा पर मौजूद घाव, खरोंच या आंख, नाक और मुंह के माध्यम से यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर लेता है और लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का कारण बनता है। इस बीमारी की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, उल्टी, दस्त और आंखें लाल होने जैसे लक्षणों से होती है। शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लगने के कारण कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह संक्रमण लीवर, किडनी और फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में नंगे पैर चलने से बचें। यदि ऐसे स्थानों से गुजरना आवश्यक हो तो रबर के जूते या गमबूट का उपयोग करें। बारिश के पानी के संपर्क में आने के बाद हाथ-पैर और शरीर को साबुन से अच्छी तरह धोएं। यदि शरीर पर कोई घाव हो तो उसे ढककर रखें। बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें और स्वयं दवा लेने से बचें।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और स्वास्थ्य विभाग ने भी बारिश के मौसम में लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी, नियमित सफाई और जनजागरूकता अभियान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से लेप्टोस्पायरोसिस पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, इसलिए किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।