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भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढही, 10 लोगों की मौत l

मुंबई से सटे ठाणे जिले के भिवंडी में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब 'कोहिनूर' नाम की चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि राहत और बचाव अभियान के दौरान मलबे से सभी शव निकाल लिए गए। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने कई घंटों तक संयुक्त अभियान चलाकर मलबा हटाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत में पिछले कुछ दिनों से मरम्मत का काम चल रहा था और इसी दौरान कथित रूप से तीन पिलर तोड़ दिए गए थे, जिससे इमारत की नींव कमजोर हो गई और पूरी इमारत ढह गई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इमारत से अधिकांश निवासी बाहर नहीं निकलते, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। हादसे ने एक बार फिर जर्जर इमारतों की सुरक्षा, निर्माण नियमों के पालन और मरम्मत कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Kashish Rai01 अग. 2026, 05:39 PM IST
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भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढही, 10 लोगों की मौत l

मुंबई महानगर क्षेत्र से जुड़े ठाणे जिले के भिवंडी में गुरुवार देर रात एक बड़ा भवन हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। 'कोहिनूर' नाम की चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत गिरने की तेज आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस व आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। भारी मलबे के कारण बचाव कार्य काफी चुनौतीपूर्ण रहा। पोकलेन मशीनों, जेसीबी, गैस कटर और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाया गया। बचाव दल ने कई घंटों तक लगातार अभियान चलाकर मलबे में दबे लोगों की तलाश की। शुक्रवार शाम तक मलबे से 10 लोगों के शव बाहर निकाल लिए गए। सभी शवों को भिवंडी के इंदिरा गांधी मेमोरियल (IGM) अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद शव उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।


स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी थी और पिछले कुछ दिनों से इसमें मरम्मत का कार्य चल रहा था। लोगों का आरोप है कि मरम्मत के दौरान ठेकेदार और मजदूरों ने इमारत के तीन मुख्य पिलर तोड़ दिए, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो गई। पिलरों के हटने के बाद इमारत का भार संतुलित नहीं रह सका और उसकी नींव पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगा। इसी कारण अचानक पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में धराशायी हो गई। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही की जाएगी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे से कुछ मिनट पहले इमारत से अजीब आवाजें, कंपन और दरारों की आवाज सुनाई दे रही थी। खतरे का आभास होने पर कई परिवार तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान बच गई। हालांकि, पहली मंजिल पर मौजूद कुछ निवासी और मरम्मत कार्य में लगे मजदूर बाहर नहीं निकल पाए और मलबे के नीचे दब गए। इसी कारण यह हादसा जानलेवा साबित हुआ।


बचाव अभियान के दौरान प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया ताकि किसी भी प्रकार की बाधा न आए। एंबुलेंस, मेडिकल टीमें और आपदा प्रबंधन दल लगातार मौके पर मौजूद रहे। बचाए गए लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया और आसपास के अस्पतालों में भेजा गया। प्रशासन ने राहत कार्य को प्राथमिकता देते हुए रातभर अभियान जारी रखा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भवन की स्थिति और मरम्मत कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मरम्मत कार्य इंजीनियरों की निगरानी में और सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाता, तो शायद यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि भवन की जर्जर स्थिति के बावजूद समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जिला प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम भवन के निर्माण, मरम्मत कार्य, तकनीकी खामियों और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच करेगी। यदि जांच में ठेकेदार, भवन मालिक, इंजीनियर या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन यह भी पता लगाएगा कि क्या भवन को पहले कभी असुरक्षित घोषित किया गया था और यदि हां, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई थी।


यह हादसा एक बार फिर महाराष्ट्र सहित देशभर के शहरों में मौजूद पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी इमारतों की नियमित संरचनात्मक जांच, समय-समय पर ऑडिट और मरम्मत के दौरान तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। बिना विशेषज्ञों की निगरानी के संरचनात्मक बदलाव करना किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

फिलहाल प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है और कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।