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‘समय बर्बाद न करें’: CJI सूर्यकांत ने वकील को टोका

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वकील ने कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो का हवाला दिया, जिस पर CJI ने कहा, ‘हमारा समय बर्बाद न करें।’ मामला NEET और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से भी जुड़ा बताया गया है।

Neha Sharma22 जुल. 2026, 05:45 PM IST
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‘समय बर्बाद न करें’: CJI सूर्यकांत ने वकील को टोका

 दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वीकार नहीं किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया था। इस दौरान जब वकील ने कथित पुलिस ज्यादती के वीडियो का हवाला देते हुए मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की, तो CJI ने कहा, “हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें।”


क्या है पूरा मामला?

यह याचिका दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई से जुड़ी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित तौर पर पुलिस ने ज्यादती की और इस संबंध में वीडियो भी मौजूद हैं। वकील ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं और NEET-UG परीक्षा के संचालन तथा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार जैसे विषय भी प्रदर्शन के केंद्र में हैं।


वीडियो दिखाने की पेशकश पर CJI की प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान वकील ने कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो अदालत के सामने रखने की बात कही। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि पीठ वीडियो देखने में रुचि नहीं रखती और उसके पास वीडियो देखने का समय नहीं है। जब वकील ने दोबारा छात्रों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाया, तब CJI ने फिर कहा कि वीडियो नहीं देखे जाएंगे। इसके बाद अदालत ने याचिका की तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं दी।


सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन-कौन शामिल थे?

मामले का उल्लेख CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने तत्काल सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।


प्रदर्शन को लेकर क्या है विवाद?

दिल्ली में छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और NTA की कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान संसद की ओर मार्च करने की कोशिश के बीच प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके बाद छात्रों की ओर से कथित पुलिस ज्यादती के आरोप लगाए गए।


तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद क्या?

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दे पर तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को झटका लगा है। हालांकि, अदालत द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि याचिका में उठाए गए सभी आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष दे दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और याचिका की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच असंतोष और राजनीतिक बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों और पुलिस कार्रवाई के आरोपों पर अब आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।