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CJP Protest: जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद, सुरक्षा बढ़ी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इंटरनेट प्रतिबंध के साथ इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

Neha Sharma24 जुल. 2026, 12:32 AM IST
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CJP Protest: जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद, सुरक्षा बढ़ी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने का आदेश दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रतिबंध जंतर-मंतर के करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में लागू किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार समेत कई मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।


इंटरनेट सेवा बंद करने का फैसला क्यों लिया गया?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर दूरसंचार कंपनियों को जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के लिए कहा गया। अधिकारियों की ओर से इस कदम के पीछे कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया है। हालांकि, CJP की ओर से इंटरनेट प्रतिबंध को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी के नेताओं ने आशंका जताई कि इंटरनेट सेवा बंद किया जाना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी संभावित पुलिस कार्रवाई से पहले की तैयारी हो सकती है। CJP ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की अपील भी की है।


CJP प्रदर्शन के पीछे क्या है मुद्दा?

जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन मुख्य रूप से देश की परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों ने बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की भी मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी उठाया जा रहा है।


प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव

जंतर-मंतर और संसद के आसपास प्रदर्शन को लेकर पिछले दिनों सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त की गई है। 22 जुलाई की रात प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग का इस्तेमाल किया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधिकारियों के घायल होने की भी सूचना सामने आई है। इसके बाद प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और बढ़ा दी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मध्य दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखने की घोषणा की। इनमें राजीव चौक, पटेल चौक, बाराखंबा रोड, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और अन्य प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।


संसद के बाहर भी जारी है राजनीतिक हलचल

CJP का प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब संसद के मानसून सत्र में भी परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। विपक्षी दलों ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। वहीं, सरकार की ओर से परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक के मामलों में कार्रवाई तथा व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से न्याय दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की बात भी कही है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस कदम से संतुष्ट नहीं हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत अपनी अन्य मांगों पर कायम हैं।


इंटरनेट प्रतिबंध को लेकर उठे सवाल

जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवा बंद किए जाने के फैसले ने डिजिटल अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। इंटरनेट के जरिए प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं और देश के दूसरे हिस्सों में मौजूद समर्थकों से संपर्क करते हैं। ऐसे में इंटरनेट प्रतिबंध को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, सरकार और प्रशासन का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित हिंसा या अफवाह को रोकने पर केंद्रित है। प्रशासन का मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में मदद कर सकता है।


आगे क्या होगा?

फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। इंटरनेट प्रतिबंध और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के बीच राजधानी के मध्य क्षेत्र में सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं, जबकि सरकार और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।


CJP Protest अब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे से आगे बढ़कर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और तेज होता है। फिलहाल जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था, इंटरनेट प्रतिबंध और प्रदर्शन को लेकर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।