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CSIR का बड़ा कदम, उद्योगों को मिली नई तकनीकें

CSIR ने वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक और औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सात स्वदेशी तकनीकों को उद्योगों को हस्तांतरित किया है। इन तकनीकों का संबंध पर्यावरण निगरानी, वायु गुणवत्ता, सड़क एवं पुल सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और सड़क रखरखाव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है। इस पहल से स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।

Neha Sharma24 जुल. 2026, 12:33 AM IST
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CSIR का बड़ा कदम, उद्योगों को मिली नई तकनीकें

नई दिल्ली: भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को उद्योगों और आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने अपनी प्रयोगशालाओं में विकसित की गई 7 स्वदेशी तकनीकों को विभिन्न उद्योगों और कंपनियों को हस्तांतरित किया है। इन तकनीकों का इस्तेमाल पर्यावरण निगरानी, वायु गुणवत्ता, सड़क और पुलों की सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और सड़क रखरखाव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशालाओं में तैयार की गई वैज्ञानिक तकनीकों को व्यावहारिक और व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाना है। तकनीकों के उद्योगों को हस्तांतरण से रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे देश में स्वदेशी तकनीक और नवाचार को भी मजबूती मिलेगी।


कौन-कौन सी तकनीकें उद्योगों को सौंपी गईं?

CSIR-National Physical Laboratory (CSIR-NPL) और CSIR-Central Road Research Institute (CSIR-CRRI) की ओर से विकसित कुल 7 तकनीकों को उद्योगों को लाइसेंस दिया गया है। इनमें Rydberg Systems Based Broad Band E-Field Sensing Technology, High-Volume PM2.5 Impactor Sampler Technology और फार्मास्युटिकल ब्लिस्टर एवं संबंधित पैकेजिंग कचरे के पुनर्चक्रण से जुड़ी पर्यावरण-अनुकूल तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा CSIR-CRRI की ओर से ड्रोन आधारित पुल निरीक्षण प्रणाली VInSD-VAIU, वायु शुद्ध करने वाली Nano Photocatalytic PAVE-SEAL तकनीक, सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए PATCHFILL मशीन और CLARIVISOR नामक glare mitigation device को भी उद्योगों तक पहुंचाया गया है।


इन तकनीकों से क्या फायदा होगा?

इन तकनीकों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकता है। वायु गुणवत्ता और पर्यावरण निगरानी से जुड़ी तकनीकें प्रदूषण की निगरानी में मदद कर सकती हैं। वहीं, ड्रोन आधारित पुल निरीक्षण प्रणाली से पुलों की स्थिति का आकलन करने और उनकी सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। सड़क रखरखाव के क्षेत्र में PATCHFILL जैसी तकनीक सड़क के गड्ढों की मरम्मत को आसान और तेज बनाने में उपयोगी हो सकती है। इसी तरह PAVE-SEAL तकनीक का उद्देश्य सड़क की सतह से जुड़े पर्यावरणीय और वायु गुणवत्ता संबंधी समाधान उपलब्ध कराना है। कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में भी CSIR की तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फार्मास्युटिकल ब्लिस्टर और पैकेजिंग कचरे के पुनर्चक्रण से जुड़ी तकनीक के जरिए ऐसे कचरे के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण पर इसके प्रभाव को कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।


रिसर्च को उद्योगों तक पहुंचाने पर जोर

CSIR की इस पहल का व्यापक उद्देश्य भारत में विकसित वैज्ञानिक अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखना और उसे वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल करना है। जब किसी वैज्ञानिक तकनीक को उद्योगों को हस्तांतरित किया जाता है, तो उसके बड़े स्तर पर उत्पादन और व्यावहारिक इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी अनुसंधान एवं विकास और उद्योगों के बीच सहयोग भी मजबूत हो सकता है। वैज्ञानिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल से नई तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने में तेजी आ सकती है।


स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

CSIR की ओर से तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण भारत में स्वदेशी तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में विकसित तकनीकों के इस्तेमाल से विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर तकनीकी समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है। इस तरह CSIR की यह पहल विज्ञान और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इन तकनीकों के व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल से पर्यावरण, सड़क सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए समाधान सामने आने की उम्मीद है।