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भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में 37% गिरावट, डॉक्टरों ने बताई बड़ी वजह।

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। देश में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के नए मामलों में करीब 37 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे शुरुआती जांच, बढ़ती जागरूकता, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और HPV वैक्सीनेशन जैसी रोकथाम रणनीतियों का बड़ा योगदान है।

Vindhya Dubey22 जुल. 2026, 07:36 PM IST
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भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में 37% गिरावट, डॉक्टरों ने बताई बड़ी वजह।

सर्वाइकल कैंसर लंबे समय तक भारत में महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल रहा है। लेकिन अब बीमारी की समय पर पहचान और बचाव के उपायों पर बढ़ते जोर के कारण इसके मामलों में कमी देखने को मिल रही है।

37% कम हुए सर्वाइकल कैंसर के नए मामले

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों में लगभग 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां हर साल करीब 1.27 लाख नए मामले सामने आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 79 हजार के आसपास पहुंच गई है।  विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, अभी भी महिलाओं में नियमित जांच और जागरूकता को और बढ़ाने की जरूरत है।

स्क्रीनिंग से बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद

डॉक्टरों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर उन कैंसरों में शामिल है जिसे शुरुआती स्तर पर पहचान कर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। पहले कई महिलाएं बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती थीं, जिसके कारण मरीज अस्पताल तक पहुंचने में देर कर देते थे। अब स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग सुविधाओं के विस्तार और जागरूकता अभियानों के कारण बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा रहा है। स्क्रीनिंग के दौरान गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होने वाले असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है। इससे कैंसर बनने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है।

HPV संक्रमण को रोकना अहम कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण है। HPV के कुछ प्रकार गर्भाशय ग्रीवा में लंबे समय तक संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिससे आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। HPV वैक्सीन इस संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉक्टरों का कहना है कि किशोरावस्था में वैक्सीनेशन और नियमित स्क्रीनिंग मिलकर सर्वाइकल कैंसर के मामलों को और कम करने में मदद कर सकते हैं।

डॉक्टरों ने बताई गिरावट की बड़ी वजह

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के मामलों में कमी के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

  • महिलाओं में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता

  • नियमित कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा बढ़ना

  • HPV वैक्सीन को लेकर जानकारी और उपलब्धता में सुधार

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में अगर स्क्रीनिंग और टीकाकरण का दायरा और बढ़ाया जाता है तो सर्वाइकल कैंसर के बोझ को और कम किया जा सकता है।

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों के अनुसार, कई बार सर्वाइकल कैंसर शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता। इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है।

इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • पीरियड्स के बीच असामान्य रक्तस्राव

  • संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग

  • रजोनिवृत्ति के बाद खून आना

  • असामान्य योनि स्राव

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द

  • लंबे समय तक कमजोरी या असहजता

इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सरकारी प्रयासों से मजबूत हुआ कैंसर नियंत्रण अभियान

भारत में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के तहत कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर महिलाओं को जांच के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि बचाव और शुरुआती पहचान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अभी भी चुनौतियां बरकरार

हालांकि सर्वाइकल कैंसर के मामलों में कमी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और HPV वैक्सीनेशन की पहुंच बढ़ाना अभी भी बड़ी चुनौती है। जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और नियमित जांच से दूरी बीमारी के नियंत्रण में बाधा बन सकती है।


भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में 37 प्रतिशत की कमी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, स्क्रीनिंग, HPV वैक्सीनेशन और महिलाओं में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता इस बदलाव की मुख्य वजह हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच और समय पर इलाज के जरिए इस बीमारी को और नियंत्रित किया जा सकता है।