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UCC बिल की एंट्री, भूमि खरीद विवाद पर गरमाई MP विधानसभा

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पेश किया। इस दौरान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामलों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा और जांच की मांग की, जबकि सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए UCC बिल को राज्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

Neha Sharma20 जुल. 2026, 09:59 PM IST
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UCC बिल की एंट्री, भूमि खरीद विवाद पर गरमाई MP विधानसभा

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राजनीतिक माहौल काफी गरम रहा। एक ओर राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक सदन में पेश किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामलों को लेकर सरकार को घेरते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष के हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।


सरकार की ओर से राज्य के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने UCC विधेयक सदन में पेश किया। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून से अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक अधिकारों और रीति-रिवाजों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, विधानसभा में प्रश्नकाल समाप्त होते ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामलों को लेकर सरकार पर हमला बोल दिया।


 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव रखा। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री के पद संभालने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं द्वारा की गई जमीन खरीद की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की मांग को नियमों के विरुद्ध बताते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।


भूमि खरीद विवाद हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद चर्चा में आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन क्षेत्र में कई जमीनों की खरीद की। कांग्रेस ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है। वहीं भाजपा और राज्य सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है।


सरकार का कहना है कि UCC विधेयक प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनता के अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए UCC को प्राथमिकता दे रही है और भूमि खरीद विवाद पर जवाब देने से बच रही है। अब विधानसभा में UCC विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज हो सकता है।