health

गर्भवती महिलाओं में मिले Zearalenone के संकेत

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक नया वैज्ञानिक अध्ययन चर्चा में है। अमेरिका में किए गए एक छोटे पायलट अध्ययन में शामिल सभी गर्भवती महिलाओं के शरीर में ऐसे फफूंद जनित विषाक्त पदार्थ (मायकोटॉक्सिन) पाए गए, जिनमें एस्ट्रोजन हार्मोन जैसा प्रभाव डालने की क्षमता होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से मक्का (कॉर्न) और उससे बने खाद्य उत्पादों में पनपने वाली कुछ फफूंद से जुड़े होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह एक प्रारंभिक अध्ययन है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कॉर्न उत्पाद गर्भावस्था में सीधे नुकसान पहुंचाते हैं।

Vindhya Dubey23 जुल. 2026, 08:22 PM IST
खबर शेयर करें:
गर्भवती महिलाओं में मिले Zearalenone के संकेत

अध्ययन में पाया गया कि सभी प्रतिभागियों के जैविक नमूनों में जियरालेनोन (Zearalenone) और उससे जुड़े मेटाबोलाइट्स के संपर्क के संकेत मिले। जियरालेनोन एक मायकोटॉक्सिन है, जो Fusarium नामक फफूंद द्वारा उत्पन्न होता है। यह फफूंद मक्का के अलावा गेहूं, जौ और अन्य अनाजों में भी विकसित हो सकती है, खासकर तब जब फसल की कटाई, परिवहन या भंडारण के दौरान नमी और तापमान का उचित ध्यान न रखा जाए।

क्या है जियरालेनोन और क्यों है चिंता?

जियरालेनोन को "एस्ट्रोजेनिक मायकोटॉक्सिन" कहा जाता है क्योंकि इसकी रासायनिक संरचना शरीर के प्राकृतिक एस्ट्रोजन हार्मोन की तरह कुछ जैविक प्रभाव उत्पन्न कर सकती है। प्रयोगशाला और पशुओं पर हुए कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि अत्यधिक मात्रा में इसका संपर्क प्रजनन तंत्र और हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इंसानों में विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इस क्षेत्र में और बड़े तथा विस्तृत शोध की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

अध्ययन में क्या सामने आया?

यह एक पायलट स्टडी थी, यानी सीमित संख्या में प्रतिभागियों पर किया गया शुरुआती शोध। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि गर्भवती महिलाओं में मायकोटॉक्सिन के संपर्क की स्थिति क्या है। जांच में शामिल सभी गर्भवती महिलाओं के नमूनों में जियरालेनोन या उससे जुड़े यौगिकों के निशान मिले। हालांकि, अध्ययन में यह नहीं पाया गया कि इन महिलाओं या उनके गर्भस्थ शिशुओं में इन विषाक्त पदार्थों के कारण कोई बीमारी, जन्म दोष या गर्भावस्था संबंधी जटिलता हुई हो। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अध्ययन केवल एक्सपोजर (Exposure) को दर्शाता है, न कि किसी बीमारी का कारण साबित करता है।

फफूंद जनित विषाक्त पदार्थ आखिर आते कहां से हैं?

मायकोटॉक्सिन प्राकृतिक रूप से कुछ प्रकार की फफूंद द्वारा बनाए जाने वाले विषैले रसायन होते हैं। यदि अनाज को नमी वाली जगह पर रखा जाए या उसका भंडारण सही तरीके से न किया जाए, तो उसमें फफूंद विकसित हो सकती है और मायकोटॉक्सिन बनने लगते हैं। मक्का, गेहूं, जौ, जई और कुछ अन्य अनाजों में इनका जोखिम अधिक माना जाता है। हालांकि, आधुनिक खाद्य सुरक्षा प्रणालियों में इनकी नियमित जांच की जाती है ताकि बाजार में पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित रहें।

क्या गर्भवती महिलाओं को कॉर्न खाना बंद कर देना चाहिए?

विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस अध्ययन के आधार पर गर्भवती महिलाओं को मक्का या उससे बने खाद्य पदार्थ खाना बंद करने की सलाह नहीं दी जा सकती। कॉर्न कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों, फाइबर और ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। यदि खाद्य पदार्थ सुरक्षित तरीके से तैयार और संग्रहित किए गए हों, तो उनका सेवन सामान्य रूप से किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण है, न कि किसी एक खाद्य पदार्थ से पूरी तरह दूरी बनाना।

विशेषज्ञों की क्या सलाह है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को संतुलित और विविध आहार लेना चाहिए। किसी भी खाद्य पदार्थ पर फफूंद दिखाई दे, बदबू आए या उसकी गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए। घर में अनाज को सूखी और साफ जगह पर रखें, नमी से बचाएं और लंबे समय तक खुले वातावरण में न छोड़ें। पैक्ड फूड खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग की स्थिति भी जांचना जरूरी है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि फिलहाल गर्भवती महिलाओं को इस अध्ययन से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा एजेंसियां नियमित रूप से अनाज और खाद्य उत्पादों में मायकोटॉक्सिन के स्तर की निगरानी करती हैं।

आगे क्यों जरूरी है बड़ा शोध?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन केवल शुरुआती संकेत देता है। यह समझने के लिए कि गर्भावस्था के दौरान जियरालेनोन और अन्य मायकोटॉक्सिन का मां और शिशु के स्वास्थ्य पर वास्तव में क्या प्रभाव पड़ता है, हजारों महिलाओं पर लंबे समय तक चलने वाले विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता होगी। ऐसे शोध यह भी स्पष्ट करेंगे कि सुरक्षित एक्सपोजर की सीमा क्या है और किन परिस्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है।


गर्भवती महिलाओं में एस्ट्रोजन जैसे प्रभाव वाले मायकोटॉक्सिन मिलने का यह अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे खतरे की अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह शोध केवल संभावित एक्सपोजर की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, सुरक्षित खाद्य भंडारण, गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों का चयन और नियमित प्रसवपूर्व जांच गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।