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पोषण योजना में डिजिटल बदलाव, फेस रिकग्निशन से होगा राशन वितरण
देश में कुपोषण की समस्या को कम करने और बच्चों तथा महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने पूरक पोषण कार्यक्रम (Supplementary Nutrition Programme) के तहत पोषण मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार अब केवल भोजन की मात्रा और कैलोरी की पूर्ति पर नहीं, बल्कि पोषण की गुणवत्ता, आहार विविधता और आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को ऐसा संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनके शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी हो सकें और कुपोषण की समस्या को प्रभावी तरीके से कम किया जा सके।
पोषण अंतर को कम करने के लिए पूरक आहार व्यवस्था
सरकार के अनुसार, कई बार सामान्य भोजन से बच्चों और महिलाओं की दैनिक पोषण आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती हैं। अनुशंसित आहार भत्ता (Recommended Dietary Allowance-RDA) और लोगों के औसत दैनिक सेवन (Average Daily Intake-ADI) के बीच जो अंतर रह जाता है, उसे पूरा करने के लिए पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है।
यह सुविधा देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दी जाती है। इसके तहत लाभार्थियों को:
- टेक-होम राशन (THR)
- सुबह का नाश्ता
- गर्म पका हुआ भोजन
उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को मिलता है।
बच्चों की उम्र के अनुसार तय किए गए पोषण मानक
सरकार ने बच्चों की उम्र और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग पोषण मानक तय किए हैं। 6 से 12 महीने के बच्चों को प्रतिदिन 200 किलो कैलोरी और 8 से 10 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाता है। यह उम्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए इस दौरान पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन की जरूरत होती है। 1 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिदिन 400 किलो कैलोरी और 15 से 20 ग्राम प्रोटीन का प्रावधान किया गया है। 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए भी 400 किलो कैलोरी और 15 से 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा बच्चों को सात महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व भी दिए जाते हैं, जो शरीर की वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण
सरकार ने गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition-SAM) बच्चों पर विशेष ध्यान दिया है। 6 महीने से 5 वर्ष तक के ऐसे बच्चों को सामान्य पोषण के अलावा अतिरिक्त टेक-होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चों को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषक तत्व उपलब्ध कराना है, जिनका वजन और विकास उनकी उम्र के अनुसार कम है।
पोषण वितरण में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
पोषण योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार तकनीक का उपयोग कर रही है। 6 से 23 महीने तक के बच्चों के लिए टेक-होम राशन का वितरण आंगनवाड़ी केंद्रों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत लाभार्थी बच्चों की पहचान डिजिटल माध्यम से की जाती है और राशन माताओं या अभिभावकों को उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
नए पोषण मानकों में गुणवत्ता को मिली प्राथमिकता
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, संशोधित पोषण मानदंड राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 की जनवरी 2023 में संशोधित अनुसूची-II के अनुरूप बनाए गए हैं। पहले पूरक पोषण कार्यक्रमों में मुख्य रूप से कैलोरी की मात्रा पर ध्यान दिया जाता था। लेकिन नए मानकों में भोजन की गुणवत्ता और पोषण विविधता को भी शामिल किया गया है। अब पूरक पोषण में केवल पेट भरने वाला भोजन नहीं, बल्कि ऐसा आहार देने पर जोर है जिसमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद हों।नए मानकों में शामिल हैं:
- बेहतर गुणवत्ता वाला प्रोटीन
- स्वस्थ वसा
- कैल्शियम
- आयरन
- जिंक
- आहार फोलेट
- विटामिन A
- विटामिन B6
- विटामिन B12
ये पोषक तत्व बच्चों के विकास, खून की कमी रोकने, हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
स्थानीय खान-पान को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय जरूरतों और खान-पान की आदतों के अनुसार पोषण मेन्यू तैयार करने की अनुमति दी है। इससे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को योजना में शामिल किया जा सकेगा। राज्यों को स्थानीय अनाज, बाजरा, दालें, सब्जियां, फल और मेवों को भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विशेष रूप से बाजरा जैसे मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि इनमें फाइबर, खनिज और अन्य पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के शुरुआती 6 वर्षों में बच्चों को मिलने वाला पोषण उनके भविष्य के स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और शारीरिक विकास को प्रभावित करता है। वहीं गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं को पर्याप्त पोषण मिलने से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। सरकार का मानना है कि बेहतर पोषण व्यवस्था से बच्चों में कम वजन, कमजोरी और विकास संबंधी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
पोषण अभियान को मिलेगा और मजबूती
पूरक पोषण कार्यक्रम को पोषण अभियान के साथ जोड़कर देश में कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल भोजन वितरण केंद्र न रहकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और विकास के महत्वपूर्ण केंद्र बनें। नए पोषण मानकों के माध्यम से सरकार मात्रा के साथ गुणवत्ता पर भी जोर दे रही है, जिससे देश के करोड़ों बच्चों और महिलाओं को संतुलित और बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सके।
