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मंत्रालयों को PM मोदी की नई सोच अपनाने की सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालयों और विभागों से बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अधिक युवा, गतिशील और नवाचार आधारित कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने अधिकारियों से पारंपरिक प्रशासनिक सोच से आगे बढ़कर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने, नई तकनीकों को अपनाने और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया। सरकार का मानना है कि इससे नीति निर्माण, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

Neha Sharma30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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मंत्रालयों को PM मोदी की नई सोच अपनाने की सलाह

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालयों और विभागों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश देते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, नई तकनीकों और बदलते सामाजिक-आर्थिक वातावरण के बीच सरकारी संस्थानों को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा। मंत्रालयों को अधिक युवा सोच, गतिशीलता और नवाचार के साथ काम करना चाहिए ताकि देश की विकास यात्रा को नई गति मिल सके।

प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों की कार्यप्रणाली, नीति निर्माण, भविष्य की योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की नीतियां केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों और संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।


उन्होंने अधिकारियों को नई तकनीकों, विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और आधुनिक प्रशासनिक उपकरणों का अधिक प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी। उनका कहना था कि तकनीक का बेहतर उपयोग न केवल सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाएगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी तेज और प्रभावी बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई विकास परियोजनाएं एक से अधिक मंत्रालयों से जुड़ी होती हैं, इसलिए विभागों के बीच तालमेल मजबूत होना जरूरी है। यदि मंत्रालय आपसी सहयोग और साझा रणनीति के साथ काम करेंगे तो परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।


बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से परिणाम आधारित प्रशासन (Result-Oriented Governance) अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिकों तक समय पर लाभ पहुंचाने से तय होती है। इसलिए प्रत्येक मंत्रालय को अपने कार्यों की नियमित समीक्षा करनी चाहिए और तय समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत के सामने निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण बढ़ाने, रोजगार सृजन, डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने जैसे कई अवसर मौजूद हैं। इन अवसरों का लाभ तभी उठाया जा सकता है जब सरकारी तंत्र तेज निर्णय लेने वाला, नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने वाला हो।


उन्होंने अधिकारियों से नागरिक-केंद्रित प्रशासन को प्राथमिकता देने की भी अपील की। प्रधानमंत्री का कहना था कि प्रत्येक सरकारी निर्णय का अंतिम उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होना चाहिए। इसके लिए मंत्रालयों को फील्ड स्तर पर मिलने वाले फीडबैक को गंभीरता से लेना चाहिए और नीतियों में आवश्यक सुधार करते रहना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा, विनिर्माण और वैश्विक निवेश के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को भी नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप अधिक लचीला, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।


सरकार का मानना है कि यदि मंत्रालय नवाचार, बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया के साथ काम करेंगे तो न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश वातावरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।