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राजस्थान में हाईवे किनारे जमीन के उपयोग पर नई पाबंदियां लागू

राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास अनियोजित विकास रोकने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए भूमि उपयोग नियम लागू किए हैं। अब राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से 40 मीटर के भीतर आवासीय और 75 मीटर के भीतर व्यावसायिक भूमि कन्वर्जन की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम भविष्य के सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड और हाईवे विकास को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। हाईवे के पास जमीन खरीदने या निवेश करने वालों को अब दूरी, भूमि रिकॉर्ड और कन्वर्जन नियमों की जांच करना जरूरी होगा।

Neha Sharma01 अग. 2026, 09:31 PM IST
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राजस्थान में हाईवे किनारे जमीन के उपयोग पर नई पाबंदियां लागू
राजस्थान: राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास जमीन के उपयोग में बदलाव को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से तय दूरी के भीतर जमीन को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य हाईवे के किनारे अनियोजित विकास को रोकना, सड़क सुरक्षा मजबूत करना और भविष्य की सड़क परियोजनाओं के लिए जरूरी क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास जमीन के इस्तेमाल को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद राज्य में हाईवे के पास जमीन के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए कन्वर्जन पर पाबंदियां लागू की गई हैं।

नए प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से 40 मीटर के दायरे में जमीन को आवासीय उपयोग के लिए और 75 मीटर के दायरे में व्यावसायिक उपयोग के लिए कन्वर्ट नहीं किया जा सकेगा। इस फैसले का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अनियंत्रित निर्माण और अव्यवस्थित व्यावसायिक गतिविधियों को रोकना है। साथ ही, सरकार सड़क सुरक्षा और हाईवे के भविष्य के विकास को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित भूमि उपयोग व्यवस्था लागू करना चाहती है।

40 और 75 मीटर का नियम क्या है?
नए प्रावधान में दूरी की गणना राष्ट्रीय राजमार्ग की मध्य रेखा यानी सेंटर लाइन से की जाएगी।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से 40 मीटर तक जमीन का आवासीय उपयोग के लिए कन्वर्जन प्रतिबंधित रहेगा।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से 75 मीटर तक जमीन का व्यावसायिक उपयोग के लिए कन्वर्जन नहीं किया जा सकेगा।
इसका असर उन जमीन मालिकों पर पड़ सकता है, जो हाईवे के पास स्थित कृषि भूमि को भविष्य में आवासीय प्लॉट, कॉलोनी, दुकान, होटल, ढाबा, गोदाम या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बदलने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, किसी जमीन पर नियम का वास्तविक प्रभाव उसकी स्थिति, भूमि रिकॉर्ड, मौजूदा उपयोग और संबंधित विभाग की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।

सड़क सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी मानी जा रही है सख्ती?
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे तेजी से बढ़ते निर्माण कई जगह सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती बनते हैं। हाईवे के पास होटल, ढाबे, दुकानें, गोदाम और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। कई स्थानों पर सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग, वाहनों का अचानक रुकना, अनधिकृत प्रवेश मार्ग और स्थानीय यातायात का हाईवे पर आना दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • सड़क किनारे अनियोजित निर्माण रोका जा सके।
  • वाहनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित बनाई जा सके।
  • भविष्य में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों में बाधा न आए।
  • सर्विस रोड और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध रहे।
  • हाईवे कॉरिडोर पर यातायात का दबाव नियंत्रित किया जा सके।

जमीन मालिकों और निवेशकों पर क्या असर पड़ सकता है?
राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित जमीन को अक्सर व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, ट्रांसपोर्ट कार्यालय, वेयरहाउस और अन्य कारोबार विकसित होने की संभावना रहती है। नई पाबंदियों के बाद हाईवे के पास जमीन खरीदने या उसमें निवेश करने वाले लोगों को भूमि उपयोग से जुड़े नियमों की पहले से जांच करनी पड़ सकती है।

यदि कोई जमीन प्रतिबंधित दायरे में आती है, तो उसके आवासीय या व्यावसायिक कन्वर्जन की अनुमति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जमीन खरीदने से पहले उसकी दूरी, राजस्व रिकॉर्ड, मौजूदा भूमि उपयोग और लागू नियमों की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि इस नियम के कारण हर प्रभावित जमीन की कीमत कम हो जाएगी। जमीन का मूल्य उसके स्थान, सड़क तक पहुंच, आसपास के विकास, कानूनी स्थिति और भविष्य की परियोजनाओं सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।

क्या पुराने मकान और दुकानें भी प्रभावित होंगी?
नए नियम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के पास पहले से बने मकान, दुकान, होटल और ढाबों का क्या होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से जमीन के उपयोग में नए बदलाव या कन्वर्जन पर प्रतिबंध से जुड़ी है। इसलिए केवल 40 या 75 मीटर के दायरे में होने के आधार पर किसी पुराने निर्माण को अपने आप अवैध नहीं माना जा सकता।
  • निर्माण कब किया गया था?
  • क्या निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी?
  • क्या जमीन का उपयोग कानूनी रूप से बदला गया था?
  • क्या निर्माण स्वीकृत योजना के अनुसार हुआ था?
  • क्या निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग की जमीन या निर्धारित राइट ऑफ वे में आता है?
इन मामलों में अलग-अलग दस्तावेज और स्थानीय नियम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए पुराने निर्माणों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक जांच और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।

प्रशासन के सामने लागू करने की चुनौती
राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास बड़ी संख्या में गांव, कस्बे, कृषि क्षेत्र और विकसित आबादी मौजूद है। ऐसे में नियम को जमीन पर लागू करने के लिए स्पष्ट सीमांकन जरूरी होगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि हाईवे की आधिकारिक सेंटर लाइन की सही पहचान हो और प्रतिबंधित क्षेत्र का सीमांकन स्पष्ट तरीके से किया जाए।
इसके अलावा, भूमि रिकॉर्ड, राजस्व नक्शों और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े रिकॉर्ड के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। यदि सीमांकन और नियमों की जानकारी स्पष्ट नहीं होती है, तो जमीन मालिकों और प्रशासन के बीच विवाद की संभावना बढ़ सकती है।

जमीन खरीदने से पहले क्या जांचें?
हाईवे के पास जमीन खरीदने या विकसित करने की योजना बना रहे लोगों को अब अधिक सावधानी बरतनी होगी।
  • जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग की सेंटर लाइन से कितनी दूरी पर है।
  • जमीन का मौजूदा उपयोग क्या है।
  • क्या जमीन के उपयोग में बदलाव की अनुमति मिल सकती है।
  • जमीन पर पहले से कोई निर्माण या कानूनी प्रतिबंध तो नहीं है।
  • संबंधित राजस्व और स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में जमीन की स्थिति क्या दर्ज है।
इन जानकारियों की पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग और आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड से करना जरूरी होगा।

आगे क्या होगा?
अब इस फैसले के बाद सभी की नजर इसके विस्तृत क्रियान्वयन पर रहेगी। जमीन मालिकों और निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंधित क्षेत्र का सीमांकन कैसे किया जाएगा और लंबित या भविष्य के भूमि परिवर्तन आवेदनों पर क्या असर पड़ेगा। सरकार को पुराने वैध निर्माणों, पहले से मंजूर भूमि उपयोग और प्रतिबंधित दायरे में आने वाली निजी जमीन से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत पड़ सकती है।

राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास जमीन के इस्तेमाल पर नई सख्ती सड़क सुरक्षा और नियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 40 मीटर और 75 मीटर की दूरी से जुड़े नए प्रावधान हाईवे के किनारे अनियंत्रित आवासीय और व्यावसायिक विकास को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन इस नीति का वास्तविक प्रभाव इसके स्पष्ट सीमांकन, पारदर्शी क्रियान्वयन और जमीन मालिकों को दी जाने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह फैसला केवल हाईवे किनारे होने वाले नए निर्माणों को ही नहीं, बल्कि जमीन के उपयोग, निवेश और स्थानीय विकास की योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है।