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डिजिटल क्रांति से बदलेगा भारत का सांस्कृतिक संरक्षण; संग्रहालयों और प्राचीन धरोहरों को मिल रही नई तकनीकी पहचान
संस्कृति मंत्रालय भारत की ऐतिहासिक धरोहरों, संग्रहालयों और पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। जतन सॉफ्टवेयर, ज्ञान भारतम पोर्टल, अभिलेख पटल और एआई-आधारित तकनीकों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को आम लोगों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है।
Priyanka Gaikwad03 अग. 2026, 06:37 PM IST
नई दिल्ली : भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए संस्कृति मंत्रालय डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। संग्रहालयों, पांडुलिपियों, पुरालेखों और पुरातात्विक धरोहरों के डिजिटलीकरण के माध्यम से देश की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय ने संग्रहालयों के संग्रह और पुरातात्विक वस्तुओं के डिजिटलीकरण के लिए सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित ‘जतन’ (JATAN) सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू किया है। इसके तहत म्यूजियम्स ऑफ इंडिया पोर्टल पर राष्ट्रीय स्तर के आठ संग्रहालयों, दो एएसआई साइट संग्रहालयों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालय, पुणे की डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
3.5 लाख से अधिक पांडुलिपियां ज्ञान भारतम पोर्टल पर उपलब्ध
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के उद्देश्य से संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम मिशन के तहत बड़ी संख्या में पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। वर्तमान में ज्ञान भारतम पोर्टल पर 3.5 लाख से अधिक डिजिटाइज्ड पांडुलिपियां आम जनता के लिए उपलब्ध हैं।इस मिशन का उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को सुरक्षित रखना और प्राचीन ज्ञान परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। राष्ट्रीय अभिलेखागार के दस्तावेज भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) द्वारा ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इन डिजिटल रिकॉर्ड्स को ‘अभिलेख पटल’ पोर्टल के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
वैज्ञानिक धरोहरों का भी डिजिटल संरक्षण कोलकाता स्थित बिरला इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम (BITM) ने भारतीय वैज्ञानिकों के शोध पत्र, पत्र और पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिजिटल आर्काइव तैयार किया है।एआई, वीआर और एआर से बदल रहा संग्रहालयों का अनुभव
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (NCSM) संग्रहालयों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसमें—
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
ऑगमेंटेड रियलिटी (AR)
वर्चुअल रियलिटी (VR)
कंप्यूटर विजन
सेंसर आधारित इंटरैक्टिव तकनीक
का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे दर्शकों को संग्रहालयों में अधिक आकर्षक और व्यक्तिगत अनुभव मिल रहा है।
संग्रहालयों की डिजिटल प्रगति जतन सॉफ्टवेयर के माध्यम से आठ प्रमुख संग्रहालयों की कुल 4,78,971 कलाकृतियों में से 3,36,359 कलाकृतियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। यह कुल संग्रह का लगभग 70.23 प्रतिशत है।
डिजिटल उपलब्धता में प्रमुख संग्रहालयों की स्थिति—
राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली – 1,05,452 कलाकृतियां
भारतीय संग्रहालय, कोलकाता – 77,943 कलाकृतियां
विक्टोरिया मेमोरियल हॉल – 27,922 कलाकृतियां
सालार जंग संग्रहालय – 47,504 कलाकृतियां
इलाहाबाद संग्रहालय – 62,988 कलाकृतियां
भारतीय संग्रहालय में एआई आधारित संरक्षण
भारतीय संग्रहालय, कोलकाता ने विरासत संरक्षण और डिजिटल नवाचार के लिए आईआईटी खड़गपुर के साथ मिलकर एआई आधारित पुरातात्विक वस्तुओं के संरक्षण और पुनर्स्थापना पर काम शुरू किया है। इसके अलावा भारतीय संग्रहालय ने Google Arts & Culture के साथ मिलकर डिजिटल माध्यम से विरासत को बढ़ावा देने के लिए वर्चुअल प्रदर्शनी भी तैयार की है।
ASI ने भी शुरू किए डिजिटल प्रयास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन (NMMA) के तहत प्राचीन वस्तुओं और ऐतिहासिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। ASI संग्रहालय गोवा की 723 पुरावशेषों और नागार्जुनकोंडा संग्रहालय की 8,450 पुरावशेषों को जतन सॉफ्टवेयर पर डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया गया है।
छात्रों और शिक्षकों के लिए सांस्कृतिक शिक्षा
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (CCRT) शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।इन कार्यक्रमों के तहत राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय, लाल किला, कुतुब मीनार और अन्य ऐतिहासिक स्थलों की शैक्षणिक यात्राएं कराई जाती हैं।
देशभर के विज्ञान केंद्रों का आधुनिकीकरण राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (NCSM) देशभर में 26 विज्ञान संग्रहालयों और केंद्रों का संचालन कर रही है। इसके तहत कई विज्ञान केंद्रों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जा रहा है। विज्ञान संस्कृति संवर्धन योजना (SPoCS) के तहत झारखंड, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय, मिजोरम और मणिपुर के छह विज्ञान केंद्रों का आधुनिकीकरण किया गया है।
मोबाइल ऐप से वर्चुअल म्यूजियम टूर
ASI ने हम्पी (कर्नाटक) और नालंदा (बिहार) के पुरातत्व संग्रहालयों के लिए मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किए हैं। इनके माध्यम से लोग संग्रहालयों का वर्चुअल भ्रमण कर सकते हैं और प्रदर्शित कलाकृतियों की डिजिटल जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इन डिजिटल पहलों से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम जनता के लिए भारत की सांस्कृतिक धरोहर तक पहुंच आसान हुई है।
ASI ने हम्पी (कर्नाटक) और नालंदा (बिहार) के पुरातत्व संग्रहालयों के लिए मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किए हैं। इनके माध्यम से लोग संग्रहालयों का वर्चुअल भ्रमण कर सकते हैं और प्रदर्शित कलाकृतियों की डिजिटल जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इन डिजिटल पहलों से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम जनता के लिए भारत की सांस्कृतिक धरोहर तक पहुंच आसान हुई है।
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
