लॉ एंड आर्डर

"खबर दिखाइए, कोर्ट क्लिप मत चलाइए" — सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को लेकर साफ किए नियम

"खबर दिखाइए, कोर्ट क्लिप मत चलाइए" — सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को लेकर साफ किए नियम

अदालत की चारदीवारी से निकली हर आवाज अब सीधे स्क्रीन तक नहीं पहुंचेगी! सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर बड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि न्यायालय की खबर दिखाइए, लेकिन कोर्ट की सुनवाई के वीडियो और ऑडियो क्लिप को वायरल करने से बचिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी जनता तक पहुंचना जरूरी है, मगर अधूरी क्लिप या कटे हुए वीडियो से गलत संदेश फैल सकता है।

लॉ-एंड-आर्डर05 अग. 2026 IST
मदरसों में 'वंदे मातरम्' पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: "आसमान नहीं टूट पड़ेगा", कोर्ट में गरमाई संविधान बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बहस

मदरसों में 'वंदे मातरम्' पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: "आसमान नहीं टूट पड़ेगा", कोर्ट में गरमाई संविधान बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बहस

पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान अदालत की एक मौखिक टिप्पणी पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई, जब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "यदि मदरसों में वंदे मातरम् गाया जाता है तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा।" हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि यह अंतिम फैसला नहीं है और पूरे मामले पर अभी विस्तृत सुनवाई बाकी है।

लॉ-एंड-आर्डर05 अग. 2026 IST
13 साल बाद आसाराम को पहली नियमित पैरोल: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी 20 दिन की राहत, कहा- 'सिर्फ आशंकाओं के आधार पर नहीं रोकी जा सकती पैरोल'

13 साल बाद आसाराम को पहली नियमित पैरोल: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी 20 दिन की राहत, कहा- 'सिर्फ आशंकाओं के आधार पर नहीं रोकी जा सकती पैरोल'

4 अगस्त 2026 के आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को पहली बार 20 दिन की नियमित पैरोल मंजूर की। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस की आपत्तियों को निराधार बताते हुए कहा कि पैरोल का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर होगा, न कि कल्पनाओं के आधार पर।

लॉ-एंड-आर्डर05 अग. 2026 IST
22 साल जेल में काटने के बाद मिला इंसाफ! ट्रिपल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को किया बरी, कहा- कमजोर जांच और अविश्वसनीय गवाही ने छीन लिए जिंदगी के 22 साल

22 साल जेल में काटने के बाद मिला इंसाफ! ट्रिपल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को किया बरी, कहा- कमजोर जांच और अविश्वसनीय गवाही ने छीन लिए जिंदगी के 22 साल

22 साल... करीब आठ हजार दिन... जिंदगी का सबसे कीमती वक्त सलाखों के पीछे बीत गया। आरोप था तीन महिलाओं की हत्या का, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा पड़ताल की तो जांच में गंभीर खामियां, गवाहों के विरोधाभासी बयान और सबूतों की कमजोर कड़ी सामने आई। अदालत ने साफ कहा कि सिर्फ संदेह और अविश्वसनीय गवाही के आधार पर किसी की आजादी नहीं छीनी जा सकती। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिसने देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

लॉ-एंड-आर्डर05 अग. 2026 IST
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा पर्यावरणीय फैसला! अब कूड़ा फैलाना पड़ेगा महंगा, केंद्र को देशभर के लिए सख्त मुआवजा नियम बनाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा पर्यावरणीय फैसला! अब कूड़ा फैलाना पड़ेगा महंगा, केंद्र को देशभर के लिए सख्त मुआवजा नियम बनाने का आदेश

देशभर में कचरा फैलाने वाले नगर निकायों, उद्योगों और संस्थाओं पर अब सख्ती तय मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पर्यावरण मुआवजा तय करने के लिए एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन बनाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों को केवल जुर्माना भरकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि उन्हें पर्यावरण की भरपाई की पूरी कीमत भी चुकानी होगी। यह फैसला देश में पर्यावरणीय कानूनों के क्रियान्वयन और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

लॉ-एंड-आर्डर05 अग. 2026 IST
महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, जबरन या धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा l

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, जबरन या धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा l

महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी या शादी के झांसे से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद 30 जुलाई को इसे राजपत्र में अधिसूचित किया गया। नए कानून के तहत ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, जबकि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी।

लॉ-एंड-आर्डर04 अग. 2026 IST
जोधपुर में वक्फ रिकॉर्ड पर बड़ा बवाल! जजों के सरकारी बंगले से मंदिरों तक की एंट्री पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

जोधपुर में वक्फ रिकॉर्ड पर बड़ा बवाल! जजों के सरकारी बंगले से मंदिरों तक की एंट्री पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

क्या सरकारी जजों के बंगले, मंदिर, स्कूल, कॉलेज और नगर निगम की जमीनें भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हो सकती हैं? जोधपुर से सामने आए ऐसे दावों ने राजस्थान में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। मामला मीडिया रिपोर्ट के जरिए हाईकोर्ट तक पहुंचा तो अदालत ने बिना किसी याचिका का इंतजार किए स्वयं संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया और पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी।

लॉ-एंड-आर्डर04 अग. 2026 IST
90 दिन में फैसला सुनाना होगा! बॉम्बे हाईकोर्ट ने ITAT को लगाई कड़ी फटकार, देशभर की सभी बेंचों के लिए जारी किए सख्त निर्देश

90 दिन में फैसला सुनाना होगा! बॉम्बे हाईकोर्ट ने ITAT को लगाई कड़ी फटकार, देशभर की सभी बेंचों के लिए जारी किए सख्त निर्देश

सिर्फ सुनवाई नहीं, अब समय पर फैसला भी देना होगा! बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) को लंबित मामलों पर कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि आदेश सुरक्षित रखने के बाद 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने देरी को न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताते हुए देशभर की सभी ITAT बेंचों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

लॉ-एंड-आर्डर04 अग. 2026 IST
छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण: राज्य कानून के तहत वापस ले सकते हैं FIR, 'क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स' का मतलब केवल गंभीर अपराध

छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण: राज्य कानून के तहत वापस ले सकते हैं FIR, 'क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स' का मतलब केवल गंभीर अपराध

20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के बाद दर्ज सैकड़ों एफआईआर और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने साफ किया कि राज्य सरकारें कानून के अनुसार छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर बंद (Closure Report) करने या मुकदमे वापस लेने के लिए स्वतंत्र हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि "क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स" का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है, सामान्य मामलों में फंसे छात्रों से नहीं।

लॉ-एंड-आर्डर04 अग. 2026 IST
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हर कारोबारी विवाद आपराधिक मामला नहीं!

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हर कारोबारी विवाद आपराधिक मामला नहीं!

क्या हर प्रॉपर्टी या कारोबारी विवाद में एफआईआर दर्ज कर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि केवल अनुबंध का उल्लंघन या पैसे की वापसी का विवाद अपने आप में धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात नहीं बन जाता। अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल किसी कारोबारी विवाद में दबाव बनाने के लिए नहीं किया जा सकता और जहां विवाद मूल रूप से सिविल प्रकृति का हो, वहां पक्षकारों को सिविल कानून के तहत उपलब्ध उपाय अपनाने चाहिए।

लॉ-एंड-आर्डर04 अग. 2026 IST