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महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, जबरन या धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा l

महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी या शादी के झांसे से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद 30 जुलाई को इसे राजपत्र में अधिसूचित किया गया। नए कानून के तहत ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, जबकि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी।

Kashish Rai04 अग. 2026, 07:03 PM IST
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महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, जबरन या धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा l

महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा और अहम कानूनी बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार द्वारा पारित ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ अब आधिकारिक रूप से प्रभावी हो चुका है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद 30 जुलाई को इस कानून को राज्य के राजपत्र में प्रकाशित किया गया, जिसके साथ ही यह पूरे राज्य में लागू हो गया। इससे पहले, महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों ने इस विधेयक को मार्च 2026 में बजट सत्र के दौरान पारित किया था। लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रपति की सहमति मिलने से अब यह कानून पूरी तरह से लागू हो गया है।


नए कानून का मुख्य उद्देश्य जबरन, धोखाधड़ी, लालच, दबाव, अनुचित प्रभाव या शादी के झांसे के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। अधिनियम के तहत ऐसे किसी भी धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध माना गया है। कानून में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति बल, प्रलोभन, गलत जानकारी या विवाह के बहाने किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कानून के तहत पहली बार अपराध करने पर आरोपी को अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है। वहीं, यदि आरोपी दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है। इसके साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है, जिससे कानून को और सख्त बनाया गया है।


कानून का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद भी निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराने का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार भी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई को और मजबूत बनाने की कोशिश की गई है।


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इस कानून का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को बाधित करना नहीं, बल्कि जबरन और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। राज्य सरकार ने यह भी दोहराया है कि यह कानून स्वेच्छा से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन या अंतरधार्मिक विवाहों के खिलाफ नहीं है। इस कानून के लागू होने के साथ ही महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां पहले से ही धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर कानूनी निगरानी और सख्ती बढ़ेगी। वहीं, इस कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी तेज हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ विषय है।