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धामनोद में महिला उद्यमियों के मेले में शामिल हुईं सावित्री ठाकुर, 'वोकल फॉर लोकल' और महिला सशक्तिकरण को बताया आत्मनिर्भर भारत की ताकत

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने मध्य प्रदेश के धामनोद में आयोजित महिला उद्यमियों के विशेष मेले में भाग लिया। अपने गृह क्षेत्र में आयोजित इस मेले में उन्होंने स्थानीय महिला उद्यमियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नारी सशक्तिकरण', 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

Vindhya Dubey03 अग. 2026, 06:53 PM IST
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धामनोद में महिला उद्यमियों के मेले में शामिल हुईं सावित्री ठाकुर, 'वोकल फॉर लोकल' और महिला सशक्तिकरण को बताया आत्मनिर्भर भारत की ताकत

यह मेला युवा महिला उद्यमियों पद्मा पाटीदार और रजनी पाथरवाला की पहल पर आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र की अनेक महिला उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए और महिला उद्यमियों के स्टॉल पर पहुंचकर उनके उत्पादों की खरीदारी की।

महिला उद्यमिता को मिला नया मंच

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि देश की महिलाएं आज केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और छोटे शहरों की महिलाओं में व्यवसाय शुरू करने की अपार क्षमता है, लेकिन उन्हें बाजार, विपणन और ग्राहकों तक पहुंच के अवसरों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि धामनोद में आयोजित यह मेला इसी सोच का परिणाम है, जहां स्थानीय महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, ग्राहकों से सीधे जुड़ने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने का अवसर मिला।

'वोकल फॉर लोकल' को मिली नई ऊर्जा

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया 'वोकल फॉर लोकल' अभियान केवल स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि जब लोग स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। यही प्रक्रिया आगे चलकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर

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सावित्री ठाकुर ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के विकास के लिए आवश्यक है। जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो परिवार की आय बढ़ती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा समाज में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास, वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। 

स्थानीय उत्पादों को मिला प्रोत्साहन

मेले में महिला उद्यमियों ने हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, खाद्य उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और अन्य स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन किया। आगंतुकों ने इन उत्पादों में रुचि दिखाई और बड़ी संख्या में खरीदारी की, जिससे महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मेले केवल बिक्री का मंच नहीं होते, बल्कि नए उद्यमियों को बाजार की मांग समझने, ग्राहकों से सीधे संवाद स्थापित करने और अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

सोशल मीडिया पर भी की पहल की सराहना

सावित्री ठाकुर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर भी इस आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नारी सशक्तिकरण' और 'वोकल फॉर लोकल' के विजन को साकार करने की दिशा में प्रेरणादायक कदम है। उन्होंने कहा कि स्थानीय महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगा बल

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों का दायरा बढ़ाया जाता है, तो इससे महिला उद्यमिता को नई गति मिलेगी। स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों तथा ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का मानना है कि महिलाओं को बाजार से जोड़ने, उनकी उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी पहलें देश में समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।