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अमेठी में नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध मौत, प्रिंसिपल-वार्डन पर हत्या का केस l
अमेठी के मुंशीगंज स्थित इंदिरा गांधी नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में GNM फाइनल ईयर की छात्रा दीप्ति यादव का शव कमरे में पंखे से लटका मिला। घटना रक्षाबंधन के दिन हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर फोरेंसिक जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। छात्रा के परिवार ने आत्महत्या की बात से इनकार करते हुए हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने कॉलेज के प्रिंसिपल और वार्डन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
Kashish Rai30 अग. 2026, 02:12 PM IST

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मुंशीगंज थाना क्षेत्र स्थित इंदिरा गांधी स्कूल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग के हॉस्टल में GNM फाइनल ईयर की छात्रा दीप्ति यादव का शव कमरे में पंखे से लटका मिला। घटना रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त की बताई जा रही है। दीप्ति मूल रूप से सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र के सादिबुल्ला गांव की रहने वाली थी। वह अमेठी में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी और अपने फाइनल ईयर की परीक्षा की तैयारी में जुटी थी। परिवार के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह दीप्ति ने अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत सामान्य थी और घरवालों को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला, जिससे उन्हें लगे कि वह किसी परेशानी में है या कोई बड़ा कदम उठाने वाली है।
सुबह परिवार से बातचीत के कुछ घंटे बाद हॉस्टल में दीप्ति के कमरे के आसपास रहने वाली छात्राओं को कुछ असामान्य लगा। बताया जा रहा है कि कमरे से कोई आवाज नहीं आ रही थी। शक होने पर छात्राओं ने वार्डन को इसकी जानकारी दी। कमरा खोले जाने पर दीप्ति का शव पंखे से दुपट्टे के सहारे लटका मिला। इस दृश्य के बाद हॉस्टल और कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रबंधन की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद मुंशीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। कमरे में मौजूद सामान और अन्य संभावित साक्ष्यों को जांच के लिए सुरक्षित किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद स्पष्ट होगी। पुलिस छात्रा के मोबाइल फोन, कमरे की स्थिति और उसके संपर्क में रहे लोगों से जुड़ी जानकारी की भी जांच कर रही है।
दूसरी ओर, दीप्ति के परिवार ने उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया है। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई और बाद में शव को फंदे से लटका दिया गया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दीप्ति के पिता कुंवर बख्श यादव ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उनका कहना है कि जब वे कॉलेज पहुंचे, तब उन्हें बेटी को देखने तक नहीं दिया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। छात्रा की मां सुनीता यादव ने भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी को हॉस्टल में मारने के बाद फंदे से लटकाया गया। उन्होंने कहा कि दीप्ति ने घटना वाले दिन सुबह उनसे फोन पर बात की थी और बातचीत के दौरान वह सामान्य लग रही थी।
परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने उनके पहुंचने से पहले ही शव को पोस्टमार्टम के लिए क्यों भेज दिया। परिवार का कहना है कि घटनास्थल और शव से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। शुरुआत में पुलिस ने हॉस्टल के कमरे में शव मिलने को आत्महत्या की आशंका से जोड़कर जांच शुरू की थी। क्षेत्राधिकारी अखिलेश वर्मा ने बताया था कि छात्रा के सुसाइड करने की सूचना मिली थी और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, परिजनों के आरोपों के बाद मामले में नया मोड़ आया। पुलिस ने छात्रा की मां की शिकायत के आधार पर कॉलेज के प्रिंसिपल और वार्डन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक अमेठी सरवणन टी के अनुसार, परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत सभी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है।
पुलिस अब कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल स्टाफ और छात्राओं से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दीप्ति की मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ था, कमरे में कौन-कौन आया था और घटना के समय हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी। जांच एजेंसी छात्रा के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर सकती है। इसके अलावा CCTV फुटेज, हॉस्टल के प्रवेश और निकास रजिस्टर तथा घटना के समय मौजूद कर्मचारियों और छात्राओं के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छात्रा की मौत किस वजह से हुई और उसके शरीर पर किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान थे या नहीं। फोरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मौत को लेकर सामने आए सभी दावों और आरोपों की जांच की जाएगी। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
दीप्ति के परिवार ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि कॉलेज प्रबंधन या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों और कर्मचारियों के बीच भी चिंता का माहौल है। छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल में निगरानी और कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। प्रिंसिपल और वार्डन पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और बयानों के बाद ही दीप्ति यादव की मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो पाएंगी।
सुबह परिवार से बातचीत के कुछ घंटे बाद हॉस्टल में दीप्ति के कमरे के आसपास रहने वाली छात्राओं को कुछ असामान्य लगा। बताया जा रहा है कि कमरे से कोई आवाज नहीं आ रही थी। शक होने पर छात्राओं ने वार्डन को इसकी जानकारी दी। कमरा खोले जाने पर दीप्ति का शव पंखे से दुपट्टे के सहारे लटका मिला। इस दृश्य के बाद हॉस्टल और कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रबंधन की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद मुंशीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। कमरे में मौजूद सामान और अन्य संभावित साक्ष्यों को जांच के लिए सुरक्षित किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद स्पष्ट होगी। पुलिस छात्रा के मोबाइल फोन, कमरे की स्थिति और उसके संपर्क में रहे लोगों से जुड़ी जानकारी की भी जांच कर रही है।
दूसरी ओर, दीप्ति के परिवार ने उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया है। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई और बाद में शव को फंदे से लटका दिया गया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दीप्ति के पिता कुंवर बख्श यादव ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उनका कहना है कि जब वे कॉलेज पहुंचे, तब उन्हें बेटी को देखने तक नहीं दिया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। छात्रा की मां सुनीता यादव ने भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी को हॉस्टल में मारने के बाद फंदे से लटकाया गया। उन्होंने कहा कि दीप्ति ने घटना वाले दिन सुबह उनसे फोन पर बात की थी और बातचीत के दौरान वह सामान्य लग रही थी।
परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने उनके पहुंचने से पहले ही शव को पोस्टमार्टम के लिए क्यों भेज दिया। परिवार का कहना है कि घटनास्थल और शव से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। शुरुआत में पुलिस ने हॉस्टल के कमरे में शव मिलने को आत्महत्या की आशंका से जोड़कर जांच शुरू की थी। क्षेत्राधिकारी अखिलेश वर्मा ने बताया था कि छात्रा के सुसाइड करने की सूचना मिली थी और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, परिजनों के आरोपों के बाद मामले में नया मोड़ आया। पुलिस ने छात्रा की मां की शिकायत के आधार पर कॉलेज के प्रिंसिपल और वार्डन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक अमेठी सरवणन टी के अनुसार, परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत सभी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है।
पुलिस अब कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल स्टाफ और छात्राओं से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दीप्ति की मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ था, कमरे में कौन-कौन आया था और घटना के समय हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी। जांच एजेंसी छात्रा के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर सकती है। इसके अलावा CCTV फुटेज, हॉस्टल के प्रवेश और निकास रजिस्टर तथा घटना के समय मौजूद कर्मचारियों और छात्राओं के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छात्रा की मौत किस वजह से हुई और उसके शरीर पर किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान थे या नहीं। फोरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मौत को लेकर सामने आए सभी दावों और आरोपों की जांच की जाएगी। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
दीप्ति के परिवार ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि कॉलेज प्रबंधन या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों और कर्मचारियों के बीच भी चिंता का माहौल है। छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल में निगरानी और कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। प्रिंसिपल और वार्डन पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और बयानों के बाद ही दीप्ति यादव की मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो पाएंगी।
