
‘क्या वह पर्याप्त पीड़िता थी?’ रेप ट्रायल में ‘परफेक्ट विक्टिम’ की सोच पर बॉम्बे HC के फैसले ने खड़े किए बड़े सवाल
बलात्कार मामलों में क्या पीड़िता की विश्वसनीयता इस बात से तय की जानी चाहिए कि उसने घटना के दौरान कितना विरोध किया या उसके बाद उसका व्यवहार कैसा रहा? ‘परफेक्ट विक्टिम’ की इसी सोच पर एक लेख में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। 6 अगस्त 2026 के तरुणजीत तेजपाल मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को उदाहरण बनाते हुए बताया गया है कि पीड़िता को समाज की बनाई किसी ‘आदर्श छवि’ में फिट होना जरूरी नहीं है।




