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कानपुर में ऑनलाइन परीक्षा का सॉल्वर गैंग पकड़ा गया, दो अभ्यर्थी और दो सॉल्वर गिरफ्तार
यूपी एसटीएफ ने कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में ऑनलाइन परीक्षा के दौरान सॉल्वर गैंग का खुलासा किया है। टीम ने परीक्षा केंद्र से दो सॉल्वर और दो अभ्यर्थियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि गैंग फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर अभ्यर्थियों को PWD श्रेणी में दिखाता था और फिर सहायक के तौर पर पेशेवर सॉल्वर को परीक्षा केंद्र में बैठाकर उनसे परीक्षा दिलवाता था। इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लिए जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों में कानपुर के दो अभ्यर्थी और बिहार से आए दो सॉल्वर शामिल हैं। एसटीएफ अब कथित सरगना मनीष कुमार मिश्रा और उसके सहयोगी राजू गुप्ता की तलाश कर रही है।

यूपी एसटीएफ ने कानपुर में ऑनलाइन परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़ा करने वाले सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई सचेंडी थाना क्षेत्र स्थित एक परीक्षा केंद्र पर की गई, जहां सहभागी और सहकारी क्षेत्र के बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर यानी PO और मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जा रही थी। एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो अभ्यर्थी और दो सॉल्वर शामिल हैं। आरोप है कि बिहार से आए दोनों सॉल्वर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। एसटीएफ ने उन्हें परीक्षा के दौरान ही पकड़ लिया और पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई।
गिरफ्तार अभ्यर्थियों की पहचान कानपुर निवासी अवनीश यादव और अंकित सचान के रूप में बताई गई है। वहीं, सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने पहुंचे आशीष कुमार और राहुल कुमार सिन्हा को भी गिरफ्तार किया गया है। आशीष कुमार बिहार के मधुबनी का रहने वाला है, जबकि राहुल कुमार सिन्हा शेखपुरा सराय, बिहार का निवासी बताया गया है। जांच के अनुसार, यह गैंग दिव्यांग अभ्यर्थियों को परीक्षा में सहायक उपलब्ध कराने की व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग करता था। PWD यानी Persons with Disabilities श्रेणी के अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान सहायक की सुविधा दी जाती है। इसी नियम का फायदा उठाकर गैंग पहले अभ्यर्थियों को फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए दिव्यांग दिखाता था।
इसके बाद परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी के सहायक के रूप में एक पेशेवर सॉल्वर को बैठाया जाता था। आरोप है कि सहायक के नाम पर बैठा सॉल्वर ही अभ्यर्थी की जगह ऑनलाइन परीक्षा देता था। इस पूरी प्रक्रिया के बदले गैंग अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलता था।
एसटीएफ के मुताबिक, फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार कराने से लेकर परीक्षा केंद्र में सॉल्वर की एंट्री कराने तक की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती थी। अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए सॉल्वर को उनकी जगह बैठाया जाता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र कहां से बनवाए गए और इस प्रक्रिया में किसी मेडिकल या प्रमाण पत्र जारी करने वाले व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। प्रारंभिक जांच में गैंग के संचालन से जुड़े दो नाम सामने आए हैं। एसटीएफ के अनुसार, झांसी का मनीष कुमार मिश्रा और बिहार का राजू गुप्ता इस नेटवर्क को चला रहे थे। मनीष कुमार मिश्रा मूल रूप से संतकबीर नगर का रहने वाला बताया गया है और वर्तमान में झांसी की सेंट फ्रांसिस कॉलोनी में रहता है। राजू गुप्ता की भूमिका बिहार से सॉल्वर उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों से संपर्क कराने में बताई जा रही है।
एसटीएफ ने दोनों कथित संचालकों की तलाश तेज कर दी है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मनीष और राजू ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाई है। इसके अलावा, उनके संपर्क में रहने वाले दलालों, फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वालों और परीक्षा केंद्रों तक सॉल्वर पहुंचाने वाले लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट और पैसों के लेन-देन की जांच की जा सकती है। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि अभ्यर्थियों से कितनी रकम ली गई थी और भुगतान किस माध्यम से किया गया। बैंक खातों तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए गैंग के वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
एसटीएफ की कार्रवाई से ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध सहायक सुविधा की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। परीक्षा एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सहायक के रूप में बैठने वाला व्यक्ति नियमों के अनुरूप हो और वह अभ्यर्थी की जगह परीक्षा न दे। पहचान सत्यापन, बायोमेट्रिक जांच और प्रमाण पत्रों की जांच में किसी तरह की लापरवाही सॉल्वर गैंग को मदद दे सकती है। फिलहाल चारों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ अब कथित सरगना मनीष कुमार मिश्रा और राजू गुप्ता की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस नेटवर्क से कई अन्य लोग जुड़े हो सकते हैं। आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गैंग के पूरे नेटवर्क और अब तक किए गए परीक्षा फर्जीवाड़े का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
