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चिल्लूपार में बसपा का शक्ति प्रदर्शन आज, अस्मिता चंद के सम्मेलन पर टिकी नजरें

गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सोमवार, 24 अगस्त को गोला स्थित वीएसएवी इंटर कॉलेज के खेल मैदान में बसपा का बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के लिए वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किया गया है, जिसमें करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था बताई गई है। इस कार्यक्रम के केंद्र में हाल ही में भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हुईं अस्मिता चंद हैं। उनके बसपा में आने के बाद चिल्लूपार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।

Samant Dubey24 अग. 2026, 03:11 PM IST
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चिल्लूपार में बसपा का शक्ति प्रदर्शन आज, अस्मिता चंद के सम्मेलन पर टिकी नजरें

24 अगस्त को बड़ा सम्मेलन, 10 हजार लोगों के बैठने की तैयारी

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के गोला स्थित वीएसएवी इंटर कॉलेज के खेल मैदान में होने वाले बसपा कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम के लिए बनाए गए वाटरप्रूफ पंडाल में करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। रविवार को हुई बारिश के बावजूद पंडाल को सुरक्षित बताया गया है। मैदान में जमा पानी निकालने और आयोजन स्थल को व्यवस्थित करने का काम किया जा रहा है, ताकि सम्मेलन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। क्षेत्र में प्रमुख स्थानों पर बसपा के बैनर और पोस्टर भी लगाए गए हैं।

अस्मिता चंद के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?

अस्मिता चंद लंबे समय तक भाजपा की राजनीति में सक्रिय रही हैं और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। 2021 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी अमर उजाला ने भी प्रकाशित की थी। वह 2007 में चिल्लूपार से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर बसपा के साथ राजनीतिक पारी शुरू की। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, अस्मिता चंद ने बसपा की नीतियों और मायावती के विचारों से प्रभावित होने की बात कही और 2027 में मायावती को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करने का संकल्प जताया।

भाजपा से बसपा तक का सफर

अस्मिता चंद का बसपा में जाना चिल्लूपार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में ही उन्होंने संकेत दिया था कि वह भाजपा के बजाय बसपा के बैनर तले चिल्लूपार की जनता के बीच काम करेंगी। उस समय 23 अगस्त की जनसभा में बसपा में औपचारिक रूप से शामिल होने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में उनके बसपा में शामिल होने की पुष्टि हुई। इसके बाद अब 24 अगस्त का कार्यकर्ता सम्मेलन उनके नए राजनीतिक मंच पर ताकत दिखाने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

सम्मेलन में बड़े बसपा नेताओं की मौजूदगी

कार्यकर्ता सम्मेलन में बसपा के मुख्य मंडल जोन कोऑर्डिनेटर डॉ. मदन राम के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। मुख्य कोऑर्डिनेटर डॉ. इंदु चौधरी के भी कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही गई है। इससे सम्मेलन को केवल स्थानीय कार्यकर्ता बैठक के बजाय पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

क्या अस्मिता चंद को मिलेगा बसपा का टिकट?

चिल्लूपार में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि क्या बसपा 2027 में अस्मिता चंद को अपना उम्मीदवार बनाएगी।

हालिया रिपोर्टों में इसको लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। नवभारत टाइम्स ने बताया है कि अस्मिता चंद के बसपा में आने के बाद उनके चिल्लूपार से संभावित उम्मीदवार होने की चर्चा तेज हुई है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है। वहीं, हालिया रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है कि 24 अगस्त के वीएसएवी मैदान में होने वाले बड़े कार्यक्रम में उनकी प्रत्याशिता की आधिकारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है। इसलिए सम्मेलन के बाद ही इस संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

चिल्लूपार की राजनीति क्यों महत्वपूर्ण?

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के राजनीतिक प्रभाव के लिए जाना जाता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हरिशंकर तिवारी यहां से पांच बार विधायक रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने जीत दर्ज की और वर्तमान विधायक हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले अस्मिता चंद का बसपा में आना क्षेत्र के पुराने राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। नवभारत टाइम्स ने भी चिल्लूपार में संभावित त्रिकोणीय मुकाबले और अलग-अलग सामाजिक समूहों के वोटों की भूमिका को लेकर राजनीतिक विश्लेषण प्रकाशित किया है।

चंद परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में

अस्मिता चंद का संबंध चंद परिवार से है, जिसकी क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय से मौजूदगी रही है। उनके परिवार के राजनीतिक संबंधों का भी चिल्लूपार के समीकरणों में उल्लेख किया जा रहा है। उनके पति सीपी चंद भाजपा से विधान परिषद सदस्य हैं। अस्मिता चंद के भाजपा से बसपा में जाने के बाद यह राजनीतिक स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

बसपा के लिए भी बड़ा मौका

चिल्लूपार में यह सम्मेलन बसपा के लिए भी अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाने का अवसर है। पार्टी लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अस्मिता चंद जैसी स्थानीय राजनीतिक पहचान रखने वाली नेता के बसपा में आने के बाद पार्टी को चिल्लूपार में नया राजनीतिक चेहरा मिला है। सम्मेलन में जुटने वाली भीड़, स्थानीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी और पार्टी नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिल सकता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बसपा क्षेत्र में कितनी सक्रियता से तैयारी कर रही है।

आज के सम्मेलन पर सबकी नजर

24 अगस्त का सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अस्मिता चंद के बसपा में आने के बाद चिल्लूपार में उनका पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। करीब 10 हजार लोगों की क्षमता वाले पंडाल की तैयारी और क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क से कार्यक्रम को लेकर पार्टी समर्थकों में उत्साह दिखाई दे रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सम्मेलन में बसपा नेतृत्व की ओर से क्या राजनीतिक संदेश दिया जाता है और अस्मिता चंद की 2027 की भूमिका को लेकर क्या घोषणा होती है। यदि उनकी उम्मीदवारी पर आधिकारिक मुहर लगती है, तो चिल्लूपार में 2027 के चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।