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बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों को मिलेगा संतुलित पोषण, राज्यों को स्थानीय स्वाद के अनुसार मेन्यू तैयार करने की छूट

देश में कुपोषण की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने और महिलाओं एवं बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पूरक पोषण (Supplementary Nutrition) व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में पूरक पोषण के लिए व्यापक दिशा-निर्देश (Comprehensive Guidelines for Supplementary Nutrition) जारी किए हैं, जिनमें भोजन की गुणवत्ता, पोषण विविधता, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग, लाभार्थियों में स्वीकार्यता बढ़ाने तथा पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन पर विशेष बल दिया गया है।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:31 PM IST
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बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों को मिलेगा संतुलित पोषण, राज्यों को स्थानीय स्वाद के अनुसार मेन्यू तैयार करने की छूट

मंत्रालय का कहना है कि मिशन पोषण 2.0 का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ऐसा संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार सुनिश्चित करना है, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों में कुपोषण को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय खान-पान, सांस्कृतिक परंपराओं और उपलब्ध खाद्य सामग्री के आधार पर पोषणयुक्त मेन्यू तैयार करने की पूरी स्वतंत्रता भी दी है।

सभी लाभार्थियों को मिल रहा पूरक पोषण

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत छह माह से छह वर्ष तक के सभी बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। लाभार्थियों को उनकी आयु और आवश्यकता के अनुसार टेक-होम राशन (Take Home Ration-THR), सुबह का पौष्टिक नाश्ता (Morning Snacks) तथा गर्म पका हुआ भोजन (Hot Cooked Meal-HCM) उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-2 में निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है। इन मानकों में जनवरी 2023 में संशोधन कर उन्हें अधिक वैज्ञानिक और संतुलित बनाया गया है।

केवल कैलोरी नहीं, अब गुणवत्तापूर्ण पोषण पर फोकस

मंत्रालय ने बताया कि पहले लागू पोषण मानक मुख्य रूप से कैलोरी की मात्रा पर आधारित थे, लेकिन संशोधित मानकों में भोजन की गुणवत्ता और पोषण संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को ऐसा भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है जिसमें पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक वसा तथा कैल्शियम, जिंक, आयरन, फोलेट, विटामिन-ए, विटामिन-बी6 और विटामिन-बी12 जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हों। सरकार का मानना है कि केवल पेट भरने के बजाय शरीर की वास्तविक पोषण आवश्यकताओं को पूरा करना कुपोषण से लड़ने की सबसे प्रभावी रणनीति है।

गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण सहायता

सरकार ने छह माह से पांच वर्ष तक के गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition-SAM) बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण सहायता की भी व्यवस्था की है। इन बच्चों को सामान्य पोषण के अतिरिक्त टेक-होम राशन के माध्यम से अतिरिक्त पौष्टिक आहार दिया जाता है ताकि उनका वजन, शारीरिक विकास और स्वास्थ्य तेजी से सुधर सके तथा कुपोषण से जुड़ी जटिलताओं को कम किया जा सके।

व्यापक दिशा-निर्देशों में गुणवत्ता और विविधता पर विशेष जोर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी नई व्यापक गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि पूरक पोषण केवल निर्धारित मात्रा में ही नहीं बल्कि निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप भी उपलब्ध कराया जाए। दिशा-निर्देशों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि भोजन पोषण मानकों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो तथा लाभार्थियों के बीच उसकी स्वीकार्यता भी अधिक हो। सरकार का कहना है कि यदि भोजन स्थानीय स्वाद और खान-पान की आदतों के अनुरूप होगा तो लाभार्थी उसे अधिक आसानी से अपनाएंगे और पोषण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।

पोषण शिक्षा और परिवारों की काउंसलिंग पर भी जोर

नई गाइडलाइंस में केवल भोजन वितरण तक सीमित न रहकर परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा देने पर भी विशेष बल दिया गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों और परिवार के सदस्यों को टेक-होम राशन के सही उपयोग, बच्चों के लिए उम्र के अनुसार पूरक आहार शुरू करने और संतुलित भोजन की आवश्यकता के बारे में नियमित परामर्श दें। इसका उद्देश्य केवल खाद्यान्न वितरण नहीं बल्कि पोषण संबंधी व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना है।

तेल, नमक और चीनी का कम उपयोग करने पर जागरूकता अभियान

सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) द्वारा जारी 'डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस 2024' के अनुरूप लोगों को दैनिक भोजन में तेल, नमक और चीनी का सीमित उपयोग करने के लिए जागरूक करें। इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोगों में स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित हो सके और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी कम किया जा सके।

स्थानीय खाद्य पदार्थों और मिलेट्स को मिलेगा बढ़ावा

नई नीति के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री के आधार पर पूरक पोषण तैयार करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। राज्य अपने क्षेत्र के स्वाद, संस्कृति और उपलब्ध कृषि उत्पादों को ध्यान में रखते हुए मेन्यू तैयार कर सकेंगे। मंत्रालय ने सलाह दी है कि राज्य आईसीएमआर-एनआईएन, कृषि विश्वविद्यालयों, गृह विज्ञान महाविद्यालयों तथा अन्य तकनीकी एवं पोषण विशेषज्ञ संस्थानों की सहायता से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप पौष्टिक व्यंजन विकसित करें। सरकार चाहती है कि पूरक पोषण में स्थानीय अनाज, श्रीअन्न (मिलेट्स), दालें, हरी सब्जियां, मेवे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों का अधिकाधिक उपयोग किया जाए। इससे भोजन में विविधता बढ़ेगी, पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होगी और स्थानीय कृषि उत्पादों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

जन आंदोलन के माध्यम से बदल रही पोषण संबंधी आदतें

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि कुपोषण केवल भोजन की समस्या नहीं बल्कि व्यवहार और जागरूकता से जुड़ा विषय भी है। इसलिए मिशन पोषण 2.0 के तहत सामुदायिक भागीदारी और जनजागरूकता को विशेष महत्व दिया गया है। हर वर्ष सितंबर में पोषण माह तथा मार्च-अप्रैल में पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाता है, जिनके दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापक जन आंदोलन चलाए जाते हैं। सरकार के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक 16 जन आंदोलनों के माध्यम से 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। इन अभियानों के जरिए न केवल लाभार्थियों बल्कि पूरे समुदाय को संतुलित आहार, बच्चों के पोषण, मातृ स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया है।

10.5 करोड़ सामुदायिक कार्यक्रमों से पहुंचा पोषण संदेश

मिशन पोषण 2.0 के तहत सामुदायिक आधारित कार्यक्रम (Community Based Events-CBEs) भी व्यवहार परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रत्येक माह कम से कम दो सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। अप्रैल 2022 से जून 2026 के बीच पोषण ट्रैकर पर लगभग 10.5 करोड़ सामुदायिक कार्यक्रम दर्ज किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल, स्तनपान, बच्चों के पूरक आहार, कुपोषण की रोकथाम, स्वच्छता, संतुलित भोजन और परिवार आधारित पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर लोगों को जानकारी दी जाती है।

कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में समग्र रणनीति

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 केवल पूरक पोषण उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग, पोषण शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक पोषण मानकों पर आधारित एक समग्र अभियान है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक बच्चे, गर्भवती महिला, धात्री माता और किशोरी तक समय पर संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचे, जिससे कुपोषण की समस्या में कमी आए और स्वस्थ एवं सक्षम भारत के निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जा सके।