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विकास के बदले पेड़ मुंबई क्यों गिर रहे हैं पेड़ ?

चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि पेड़ की जड़ों को पहले हुए यूटिलिटी कार्यों के दौरान नुकसान पहुंचा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा था या फिर निर्माण कार्यों में बरती गई लापरवाही का नतीजा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिस स्थान पर पेड़ खड़ा था, वहां पहले विभिन्न यूटिलिटी कार्यों के लिए खुदाई और कंक्रीटीकरण किया गया था।

Anshuman Mishra13 जुल. 2026, 03:38 PM IST
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विकास के बदले पेड़ मुंबई क्यों गिर रहे हैं पेड़ ?
विकास के बदले पेड़ मुंबई क्यों गिर रहे हैं पेड़ ?

 चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि पेड़ की जड़ों को पहले हुए यूटिलिटी कार्यों के दौरान नुकसान पहुंचा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा था या फिर निर्माण कार्यों में बरती गई लापरवाही का नतीजा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिस स्थान पर पेड़ खड़ा था, वहां पहले विभिन्न यूटिलिटी कार्यों के लिए खुदाई और कंक्रीटीकरण किया गया था। जांच में यह संभावना जताई गई है कि इन कार्यों के दौरान पेड़ की जड़ों को नुकसान पहुंचा, जिससे उसकी पकड़ कमजोर हो गई। बाद में भारी बारिश और तेज हवाओं के दबाव में पेड़ गिर गया। हालांकि समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।

बताया जा रहा है कि इस मामले की करीब 50 पन्नों की रिपोर्ट बीएमसी आयुक्त को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में घटनास्थल का निरीक्षण, पेड़ की स्थिति, जड़ों की हालत, मौसम की परिस्थितियां और संबंधित विभागों की भूमिका का विश्लेषण शामिल है। रिपोर्ट के आधार पर आगे जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाएगा।

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 क्या मुंबई के पेड़ विकास कार्यों की कीमत चुका रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन, केबल बिछाने और भूमिगत निर्माण कार्यों के दौरान अक्सर पेड़ों की जड़ों के आसपास खुदाई की जाती है। यदि यह कार्य भारतीय मानकों और वृक्ष संरक्षण दिशानिर्देशों के अनुसार न किया जाए, तो पेड़ बाहर से स्वस्थ दिखाई देने के बावजूद भीतर से कमजोर हो सकते हैं। मानसून के दौरान ऐसे पेड़ों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शहरी पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि हर बड़े यूटिलिटी प्रोजेक्ट से पहले और बाद में ट्री हेल्थ ऑडिट  अनिवार्य किया जाए। साथ ही, निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती की ओर भी इशारा करता है।
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