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लोकसभा से MSME विकास संशोधन विधेयक बिना बहस पारित

नई दिल्ली: संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। लोकसभा में शुक्रवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया गया, जबकि इससे पहले 3 अगस्त को इसे राज्यसभा से भी स्वीकृति मिल चुकी थी।

Vinod Tiwari08 अग. 2026, 04:20 PM IST
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लोकसभा से MSME विकास संशोधन विधेयक बिना बहस पारित

कारोबारियों को भुगतान में मिलेगी बड़ी राहत: इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के सामने आ रही मौजूदा चुनौतियों को कम करना, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक बेहतर बनाना और भुगतान की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाना है।

समय पर भुगतान पर विशेष जोर: विधेयक के तहत सबसे अधिक जोर उन मामलों पर दिया गया है, जिनमें छोटे कारोबारियों को समय पर उनका भुगतान नहीं मिल पाता है।

समय-सीमा और त्वरित वसूली का प्रावधान: ऐसे मामलों के जल्द से जल्द निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने और आपसी समझौतों के आधार पर राशि की वसूली करने का प्रावधान किया गया है, जिससे एमएसएमई इकाइयों की नकदी से जुड़ी दिक्कतें कम हो सकें।

अदालत का 50% भुगतान का आदेश: विधेयक में यह खास व्यवस्था भी की गई है कि यदि किसी आदेश को चुनौती देने वाली कोई याचिका छह महीने से अधिक समय तक अदालत में लंबित रहती है, तो अदालत एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को तय की गई राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दे सकेगी।


एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े अन्य मुख्य बिंदु

बढ़ता ऋण प्रवाह: एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने 3 अगस्त को राज्यसभा में जानकारी दी थी कि वर्ष 2014-15 में इस क्षेत्र को दिया गया बकाया कर्ज 10 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में ऋण का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है।


अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी: देश की कुल जीडीपी में एमएसएमई क्षेत्र की 31 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र में 36 प्रतिशत और देश के कुल निर्यात में 41 प्रतिशत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।