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यादव संघ मुंबई विवाद: अदालत का बड़ा फैसला, दोनों पक्षों की चेंज रिपोर्ट खारिज
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मुंबई:
सार्वजनिक धर्मादाय ट्रस्ट 'यादव संघ मुंबई' के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद में सहायक धर्मादाय आयुक्त-5 (ग्रेटर मुंबई) शीतल सी. साल्वी ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों पक्षों की चेंज रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि दोनों ही चुनाव प्रक्रियाएं ट्रस्ट के नियमों और कानूनी प्रावधानों के मुताबिक नहीं की गई थीं, इसलिए किसी भी समिति को वैधानिक मान्यता नहीं दी जा सकती है।
साल 2024-25 के चुनाव का मामला
लाल बहादुर आर. यादव की ओर से चुनाव के आधार पर नई कार्यकारिणी को वैधानिक मान्यता देने की मांग उठाई गई थी। हालांकि, मामले की जांच में यह बात उजागर हुई कि यह चुनाव उस समय कराया गया जब चुनाव अधिकारी का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था। इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची और करीब आठ लाख रुपये के चुनावी खर्च से जुड़े दस्तावेजों में भी गंभीर अनियमितताएं और खामियां पाई गईं, जिसके चलते धर्मादाय आयुक्त ने इस चेंज रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
साल 2023-24 के चुनाव का मामला
दूसरा विवाद वर्ष 2023-24 के संगठनात्मक चुनावों से जुड़ा हुआ था। अदालत ने अमरदेव टी. यादव की तरफ से आयोजित कराए गए चुनाव को पूरी तरह अवैध घोषित किया। अदालत के आदेश में कहा गया कि जब पूर्व से ही अधिकृत चुनाव अधिकारी नियुक्त थे, तब ऐसे में समानांतर चुनाव करवाना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध था। इसके साथ ही, लगभग 14 हजार सदस्यों को चुनाव संबंधी सूचना भेजने के संबंध में कोई पर्याप्त सबूत भी पेश नहीं किए गए थे।
'डी-फैक्टो ट्रस्टी' के रूप में तय होगी जवाबदेही
अदालत के इस फैसले के बाद अब दोनों में से किसी भी समिति को आधिकारिक तौर पर वैधानिक ट्रस्टी का दर्जा नहीं दिया गया है। हालांकि, जिस समयावधि के दौरान इन समितियों ने ट्रस्ट के कामकाज की कमान संभाली थी, उस कालखंड के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की जवाबदेही तय करने के लिए इन्हें केवल 'डी-फैक्टो ट्रस्टी' माना जाएगा। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों मामलों में किसी भी पक्ष पर कोई भी कानूनी खर्च (कॉस्ट) नहीं लगाया गया है।
