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'उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026' का ड्राफ्ट जारी; ग्रिड सुरक्षा और बेहतर बिजली आपूर्ति पर जोर

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने 'उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026' का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नए ग्रिड कोड का उद्देश्य राज्य की बिजली व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, विश्वसनीय और अधिक प्रभावी बनाना है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 06:33 PM IST
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'उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026' का ड्राफ्ट जारी; ग्रिड सुरक्षा और बेहतर बिजली आपूर्ति पर जोर

प्रस्तावित ग्रिड कोड में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इसमें पिछले लगभग दो दशकों में पावर सेक्टर में हुए तकनीकी विकास, नियामकीय बदलाव और संचालन से जुड़े अनुभवों को शामिल किया गया है। आयोग का मानना है कि बदलते ऊर्जा परिदृश्य में पारंपरिक बिजली व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों के साथ अपग्रेड करना जरूरी हो गया है। बिजली की बढ़ती मांग, नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी और ग्रिड संचालन की जटिलताओं को देखते हुए यह नया ढांचा तैयार किया गया है।

पहली बार राज्य स्तर पर लागू होगा तीन स्तरीय रिजर्व सिस्टम

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक राज्य स्तर पर पहली बार रिजर्व सिस्टम की व्यवस्था है। इसके तहत बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए तीन स्तर के रिजर्व प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:


  • प्राइमरी रिजर्व: बिजली उत्पादन और मांग में अचानक आने वाले अंतर को तुरंत नियंत्रित करने के लिए यह व्यवस्था काम करेगी। इससे ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।
  • सेकेंड्री रिजर्व: यह व्यवस्था बिजली आपूर्ति में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करने और सिस्टम को सामान्य स्थिति में वापस लाने में सहायता करेगी।
  • टर्िशयरी रिजर्व: किसी बड़े व्यवधान या लंबे समय तक चलने वाली समस्या की स्थिति में अतिरिक्त बिजली क्षमता उपलब्ध कराने के लिए इसका उपयोग किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन रिजर्व सिस्टम के लागू होने से बिजली कटौती की घटनाओं को कम करने और ग्रिड को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलेगी।

ब्लैक स्टार्ट रिजर्व से आपात स्थिति में तेजी से शुरू होगा ग्रिड

ड्राफ्ट में ब्लैक स्टार्ट रिजर्व का भी प्रावधान किया गया है। यह बिजली व्यवस्था की आपातकालीन क्षमता को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। कई बार तकनीकी खराबी, प्राकृतिक आपदा या किसी बड़े फॉल्ट के कारण बिजली ग्रिड का बड़ा हिस्सा बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में सामान्य बिजली आपूर्ति के बिना ही कुछ विशेष बिजली इकाइयों की मदद से सिस्टम को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया को ब्लैक स्टार्ट कहा जाता है। नई व्यवस्था के तहत ब्लैक स्टार्ट क्षमता को मजबूत किया जाएगा, जिससे बड़े बिजली संकट के बाद आपूर्ति जल्द बहाल की जा सकेगी।

वोल्टेज कंट्रोल रिजर्व से मिलेगी बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली

ग्रिड कोड-2026 में वोल्टेज कंट्रोल रिजर्व का प्रावधान भी किया गया है। बिजली नेटवर्क में वोल्टेज का संतुलित रहना बेहद जरूरी होता है क्योंकि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव से घरेलू और औद्योगिक उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है। इस व्यवस्था के माध्यम से बिजली कंपनियों को वोल्टेज नियंत्रण के लिए अतिरिक्त संसाधन और बेहतर प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध होगी। इससे उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलने की उम्मीद है।

सिक्योरिटी बेस्ड पावर मैनेजमेंट पर जोर

नए ग्रिड कोड में सिक्योरिटी कंस्ट्रेंड यूनिट कमिटमेंट और सिक्योरिटी कंस्ट्रेंड इकोनॉमिक डिस्पैच जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सिक्योरिटी कंस्ट्रेंड यूनिट कमिटमेंट के तहत बिजली उत्पादन इकाइयों का चयन केवल मांग और लागत के आधार पर नहीं बल्कि ग्रिड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। वहीं, सिक्योरिटी कंस्ट्रेंड इकोनॉमिक डिस्पैच व्यवस्था के तहत बिजली उत्पादन का संचालन इस तरह किया जाएगा कि उपभोक्ताओं को कम लागत पर बिजली मिले और साथ ही सिस्टम की सुरक्षा भी बनी रहे।

बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा को देखते हुए बदलाव

उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा की प्रकृति पारंपरिक बिजली उत्पादन से अलग होती है क्योंकि इसमें उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। ऐसे में ग्रिड को अधिक लचीला और मजबूत बनाना जरूरी हो गया है। नया ग्रिड कोड इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है ताकि भविष्य में बड़ी मात्रा में स्वच्छ ऊर्जा को भी बिजली नेटवर्क में सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सके।

आम जनता और हितधारकों से मांगे गए सुझाव

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने इस ड्राफ्ट पर आम जनता, बिजली उपभोक्ताओं, बिजली कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, आयोग ने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 21 अगस्त तक का समय दिया है। इस प्रक्रिया के जरिए उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों की राय को शामिल किया जाएगा, जिससे अंतिम ग्रिड कोड को और बेहतर बनाया जा सके।

11 सितंबर को होगी जनसुनवाई

ड्राफ्ट पर सार्वजनिक चर्चा के लिए 11 सितंबर को जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसमें बिजली क्षेत्र से जुड़े पक्ष अपनी राय और सुझाव आयोग के सामने रख सकेंगे। जनसुनवाई के बाद आयोग प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा करेगा और इसके आधार पर अंतिम उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026 को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

बिजली क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बिजली नेटवर्क को सुरक्षित, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाना भी जरूरी है। नया ग्रिड कोड लागू होने के बाद उम्मीद है कि:

  • बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
  • ग्रिड फेलियर की संभावना कम होगी।
  • आपात स्थिति में बिजली बहाली तेज होगी।
  • वोल्टेज की समस्या में कमी आएगी।
  • बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था अधिक कुशल बनेगी।
  • भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026 को राज्य की बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह बदलाव आने वाले वर्षों में यूपी के पावर सेक्टर को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और उपभोक्ता केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।