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एकवीरा देवी के दर्शन अब फ्यूनिक्युलर रेलवे से! MSRDC ने राज्य सरकार को भेजा प्रस्ताव

लोणावला के पास कार्ला स्थित प्रसिद्ध एकवीरा देवी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) ने मंदिर तक फ्यूनिक्युलर रेलवे बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। इस सुविधा के शुरू होने से श्रद्धालु कुछ ही मिनटों में मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष लाभ मिलेगा।

Priyanka Gaikwad03 अग. 2026, 05:34 PM IST
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एकवीरा देवी के दर्शन अब फ्यूनिक्युलर रेलवे से! MSRDC ने राज्य सरकार को भेजा प्रस्ताव
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मुंबई से करीब 60 किलोमीटर दूर लोणावला के समीप कार्ला पहाड़ियों पर स्थित एकवीरा देवी मंदिर महाराष्ट्र के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर विशेष रूप से कोली समाज की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और देश के विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चैत्र नवरात्र, आश्विन नवरात्र, पौर्णिमा तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। अनुमान है कि हर वर्ष लगभग 47 लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते हैं। हालांकि, मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों ऊंची सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

गर्मी, बारिश और त्योहारों के दौरान यह चढ़ाई और भी कठिन हो जाती है। बुजुर्ग, दिव्यांग, गर्भवती महिलाएं तथा छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई श्रद्धालु रास्ते में विश्राम करने को मजबूर हो जाते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए एमएसआरडीसी ने फ्यूनिक्युलर रेलवे परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार मंदिर तक लगभग 800 मीटर लंबी फ्यूनिक्युलर रेलवे का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 89 करोड़ रुपये होगी। रेलवे की क्षमता प्रति घंटे लगभग 1,400 यात्रियों को सुरक्षित रूप से मंदिर तक पहुंचाने की होगी। इस परियोजना को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसके तहत निजी कंपनी निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। प्रस्तावित संचालन अवधि लगभग 30 वर्ष होगी।

फ्यूनिक्युलर रेलवे सामान्य रोपवे से अलग तकनीक पर आधारित होती है। इसमें दो डिब्बे स्टील की पटरियों पर केबल की सहायता से चलते हैं। एक डिब्बा ऊपर जाता है तो दूसरा नीचे आता है, जिससे कम ऊर्जा में सुरक्षित और सुगम परिवहन संभव हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों पर यह तकनीक काफी प्रभावी मानी जाती है। एमएसआरडीसी ने यह प्रस्ताव कुछ महीने पहले राज्य सरकार को भेजा था। इसके बाद सरकार ने परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता की जांच के लिए इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के पास भेजने के निर्देश दिए। वर्तमान में परियोजना तकनीकी परीक्षण के चरण में है। आईआईटी मुंबई की रिपोर्ट और अन्य आवश्यक मंजूरियों के बाद ही परियोजना को अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की संभावना है।

इसके साथ ही एमएसआरडीसी एकवीरा देवी मंदिर परिसर के संरक्षण और विकास का कार्य भी कर रहा है। मंदिर के आसपास किए गए अस्थायी सीमेंट और धातु के निर्माण हटाकर परिसर के पारंपरिक स्वरूप को संरक्षित किया जा रहा है। पत्थर की सीढ़ियों की मरम्मत, सुरक्षा दीवारों का निर्माण, वर्षा जल निकासी व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, पेयजल, स्वच्छता सुविधाओं तथा परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी कार्य किया जा रहा है। यदि इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो एकवीरा देवी मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और आरामदायक हो जाएगी। साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और कार्ला क्षेत्र में स्थानीय रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि धार्मिक पर्यटन के आधुनिक विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।