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ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से बढ़ेगी हरित अर्थव्यवस्था की रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा अभियान

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और मिशन LiFE के तहत टिकाऊ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया एक स्वैच्छिक प्रोत्साहन आधारित कार्यक्रम है। इसके तहत वृक्षारोपण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों के बदले ग्रीन क्रेडिट दिए जाते हैं। ग्रीन क्रेडिट नियम, 2023 के तहत संचालित इस योजना में कम से कम पांच वर्ष तक सफल पुनर्स्थापन कार्य और 40 प्रतिशत कैनोपी घनत्व प्राप्त होने के बाद ही ग्रीन क्रेडिट जारी किए जाते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना, कार्बन अवशोषण में वृद्धि करना, जैव विविधता का संरक्षण, स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाना और भारत के जलवायु एवं सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत करना है।

Anshuman Mishra03 अग. 2026, 06:47 PM IST
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ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से बढ़ेगी हरित अर्थव्यवस्था की रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा अभियान
जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन जैसी चुनौतियों के बीच भारत सरकार पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (Green Credit Programme) एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। संसद में सरकार ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों, संस्थानों और निजी क्षेत्र को पर्यावरण के लिए सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम मिशन लाइफ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम एक स्वैच्छिक प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था है, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए सकारात्मक कार्यों के बदले ग्रीन क्रेडिट प्रदान किए जाते हैं। इसका उद्देश्य देश में हरित आवरण बढ़ाना, कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ावा देना, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन करना तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और व्यवहार को बढ़ावा देकर कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। इस पहल के माध्यम से सरकार नागरिकों और संस्थाओं को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना चाहती है।

सरकार ने बताया कि 12 अक्टूबर 2023 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ग्रीन क्रेडिट नियम, 2023 अधिसूचित किए गए थे। इसके बाद 22 फरवरी 2024 को वृक्षारोपण और क्षतिग्रस्त वन भूमि के पुनर्स्थापन के लिए कार्यप्रणाली जारी की गई, जिसे 29 अगस्त 2025 को संशोधित किया गया। कार्यक्रम के संचालन और पंजीकरण के लिए एक समर्पित ग्रीन क्रेडिट पोर्टल भी विकसित किया गया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), देहरादून को इस कार्यक्रम का प्रशासक बनाया गया है, जो इसके संचालन, प्रबंधन और ग्रीन क्रेडिट जारी करने की जिम्मेदारी निभाता है।

इस योजना के तहत राज्य वन विभाग पहले जमीन का सत्यापन करते हैं और फिर क्षतिग्रस्त वन भूमि को कार्यक्रम के लिए चिन्हित एवं पंजीकृत किया जाता है। कोई भी आवेदक तुरंत ग्रीन क्रेडिट प्राप्त नहीं कर सकता। इसके लिए कम से कम पांच वर्ष तक पुनर्स्थापन कार्य सफलतापूर्वक पूरा होना और संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम 40 प्रतिशत कैनोपी घनत्व (Canopy Density) प्राप्त होना आवश्यक है। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि लगाए गए पौधे पर्याप्त रूप से विकसित हो सकें और वास्तव में वन क्षेत्र की गुणवत्ता में सुधार हो।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है। क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन से जैव विविधता में वृद्धि होगी, वन संसाधनों की उत्पादकता बेहतर होगी तथा स्थानीय समुदायों को लकड़ी, लघु वनोपज, चारा, जल और अन्य पारिस्थितिकी सेवाओं का लाभ मिलेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीन क्रेडिट जारी करने से पहले नामित एजेंसी द्वारा सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए निगरानी एवं रिपोर्टिंग की विस्तृत मैनुअल भी तैयार की गई है, ताकि कार्यक्रम का क्रियान्वयन पारदर्शी, वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से हो सके।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम भारत की जलवायु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। इससे कॉर्पोरेट संस्थानों, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण में निवेश करने की प्रेरणा मिलेगी। वृक्षारोपण और वन पुनर्स्थापन से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण बढ़ेगा, जल स्रोतों का संरक्षण होगा, मिट्टी के कटाव में कमी आएगी और जैव विविधता को नया जीवन मिलेगा। यह पहल भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति तथा वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में भी सहायक मानी जा रही है।

इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर समाज और निजी क्षेत्र की साझा भागीदारी से जोड़ा जा रहा है। इससे हरित आवरण बढ़ेगा, पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, वन संसाधनों का संरक्षण होगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

लोकसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम की प्रगति, उद्देश्य और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।