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ज्ञान भारतम मिशन से संरक्षित होगी भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत; 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की हुई पहचान

भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा और पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission-GBM) तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्नत तकनीक के माध्यम से पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जा रहा है। अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की पहचान हो चुकी है, जबकि 8 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है।

Priyanka Gaikwad03 अग. 2026, 06:41 PM IST
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भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संस्कृति मंत्रालय द्वारा ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission-GBM) की शुरुआत की गई है। इस मिशन के तहत आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से देशभर में उपलब्ध पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। ज्ञान भारतम मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, पंजीकरण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करना है। साथ ही भारतीय भाषाओं, लिपियों और प्राचीन ज्ञान परंपराओं से जुड़े शोध को बढ़ावा देना भी मिशन का प्रमुख लक्ष्य है।

1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की हुई पहचान   राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण की शुरुआत मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई थी। इस सर्वेक्षण के दौरान अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है।
देशभर में 8 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियां ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

491.66 करोड़ रुपये की मंजूरी  ज्ञान भारतम मिशन को मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2025 से 2031 की अवधि के लिए स्थायी वित्त समिति (SFC) ने 491.66 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR) तैयार की जा रही है, जिसमें भारत की दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

पांडुलिपि संरक्षण और शोध को मिलेगा बढ़ावा  मिशन के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों, निजी संग्रहकर्ताओं, धार्मिक संस्थानों और अन्य हितधारकों को जोड़कर क्लस्टर सेंटर और स्वतंत्र केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पांडुलिपियों के संरक्षण, प्रशिक्षण, जागरूकता और शोध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

डिजिटल पहुंच के लिए विशेष व्यवस्था
डिजिटल पांडुलिपियों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में संग्रहकर्ताओं और अधिकार धारकों के अधिकारों का ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों को सार्वजनिक किया जा सकता है, उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित सामग्री के लिए विशेष नियमों के तहत पहुंच प्रदान की जाएगी।

बिहार के संस्थान भी जुड़े ज्ञान भारतम मिशन के तहत बिहार के कई प्रमुख संस्थान भी इससे जुड़े हैं। इनमें—
नव नालंदा महाविहार, नालंदा
खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी, पटना
श्री बोधगया मठ, बोधगया

शामिल हैं। ये संस्थान पांडुलिपि संरक्षण और संबंधित गतिविधियों में सहयोग करेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ज्ञान भारतम मिशन किसी एक भाषा, लिपि या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विविध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपराओं से जुड़ी सभी पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल है। यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।