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दिल्ली में हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश, सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख तक वसूली l
दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर आठ से 12 लाख रुपये तक वसूलता था। आरोपी शर्ट में छिपे कैमरे, नैनो ईयरबड, जीएसएम डिवाइस और विशेष मोबाइल एप के जरिए परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सहयोगियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाते और अभ्यर्थियों को उत्तर बताते थे। पुलिस ने मोबाइल फोन, जीएसएम डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, टैबलेट और एक कार बरामद की है। जांच में इस नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने की आशंका सामने आई है।

दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें लिखित परीक्षा पास कराने का दावा करता था। मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। मामला 26 मई को सामने आया, जब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों को संदिग्ध तरीके से नकल करते हुए पकड़ा गया। यह परीक्षा लोअर डिवीजन क्लर्क यानी एलडीसी के छह पदों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा में करीब 200 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियां मिलने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली, जो सरकारी विभागों और विभिन्न संस्थानों में निकलने वाली भर्तियों पर नजर रखता था। भर्ती की जानकारी मिलते ही गिरोह के सदस्य नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था और इसके बदले प्रति अभ्यर्थी आठ से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी। पुलिस के अनुसार, गिरोह खास तौर पर उन परीक्षाओं को निशाना बनाता था, जिनमें लिखित परीक्षा के बाद कौशल परीक्षा भी होती थी। आरोपी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के भीतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ भेजते थे और बाहर बैठे सहयोगियों की मदद से प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराते थे।
जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों की शर्ट के बटन के पास बेहद छोटा और छिपा हुआ कैमरा लगाया जाता था। यह कैमरा बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देता था। परीक्षा के दौरान कैमरे के जरिए प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर मौजूद गिरोह के सदस्यों तक भेजी जाती थीं। इसके बाद प्रश्नों के उत्तर तकनीकी माध्यम से अभ्यर्थियों के कान में लगे नैनो ईयरबड तक पहुंचाए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन और विशेष एंड्रॉयड एप्लिकेशन का इस्तेमाल करते थे। इनकी मदद से मोबाइल की स्क्रीन बंद रहने के बावजूद कैमरे को नियंत्रित किया जा सकता था। इसके अलावा, जीएसएम डिवाइस, छिपे हुए कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए परीक्षा केंद्र के अंदर और बाहर संपर्क बनाए रखा जाता था।
गिरोह की पूरी व्यवस्था इस तरह तैयार की गई थी कि परीक्षा केंद्र के भीतर मौजूद अभ्यर्थी बिना किसी संदेह के प्रश्नों के उत्तर लिख सकें। बाहर बैठे सदस्य प्रश्नपत्र को पढ़कर उत्तर तैयार करते थे और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाते थे। पुलिस अब बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, चार जीएसएम डिवाइस, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, एक टैबलेट और टाटा नेक्सॉन कार बरामद की है। सभी उपकरणों को फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे गिरोह के अन्य सदस्यों, एजेंटों, अभ्यर्थियों और पूर्व में कराई गई परीक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं।
पूछताछ में पता चला है कि गिरोह में कुछ आरोपी खुद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, जबकि कुछ लोग एजेंट के रूप में काम करते थे। एजेंट नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से संपर्क करते और उन्हें गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाते थे। इसके बाद अभ्यर्थियों से रकम तय कर परीक्षा में नकल कराने की व्यवस्था की जाती थी। पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 10 से 12 अभ्यर्थियों ने इस गिरोह की मदद से विभिन्न परीक्षाओं में अनुचित लाभ लेने की कोशिश की हो सकती है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर यह संख्या और बढ़ सकती है। पुलिस अब उन सभी अभ्यर्थियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने गिरोह से संपर्क किया था।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। गिरोह के संपर्क कई अन्य राज्यों में होने की आशंका है। पुलिस की विशेष टीमें दूसरे राज्यों में मौजूद आरोपियों के सहयोगियों, एजेंटों और संपर्क सूत्रों की तलाश कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने पहले भी कई सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाने की कोशिश की होगी। दिल्ली पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही है। इससे गिरोह की बातचीत, पैसे के लेन-देन, अभ्यर्थियों की सूची और पूर्व में कराई गई परीक्षाओं से संबंधित जानकारी सामने आने की उम्मीद है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी विभाग में कार्यरत बताए जा रहे मास्टरमाइंड ने अब तक किन-किन परीक्षाओं में गिरोह की मदद की और कितने अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क से जोड़ा। पूरे मामले में परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, भर्ती प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
