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नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेले की भव्य तैयारी तेज; ‘सिंहस्थ’ नहीं, अब ‘महासिंहस्थ’ की नई पहचान
नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले आगामी कुंभमेले को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस कुंभमेले को ‘महासिंहस्थ’ के नाम से नई पहचान देने की तैयारी चल रही है। केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से करीब 34 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाने की योजना है। इसमें सड़क, हाईवे, रेलवे, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Priyanka Gaikwad13 अग. 2026, 09:39 PM IST

नाशिक : नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभमेले को इस बार पहले से कहीं अधिक भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। कुंभमेले की भव्यता बढ़ाने के साथ ही इसे नई पहचान देने की दिशा में भी प्रशासन ने कदम बढ़ाए हैं। इसी के तहत नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेले को ‘महासिंहस्थ’ नाम देने की तैयारी की जा रही है। कुंभमेले के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से करीब 34 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर खर्च किए जाने की योजना है। इन कार्यों में सड़क और हाईवे का विस्तार, रेलवे नेटवर्क को मजबूत करना, यातायात व्यवस्था में सुधार तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।
कुंभमेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नाशिक में रिंग रोड और परिक्रमा मार्ग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित हैं। वहीं त्र्यंबकेश्वर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शनपथ कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है। इन परियोजनाओं के माध्यम से कुंभमेले के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। कुंभमेले की नई पहचान को लेकर ब्रांडिंग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से ‘महासिंहस्थ’ नाम को प्रचार और ब्रांडिंग के स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके साथ ही कुंभमेले के बोधचिह्न को आधिकारिक पहचान दिलाने के लिए ट्रेडमार्क की प्रक्रिया पर भी काम किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य केवल कुंभमेले को भव्य बनाना ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से नाशिक को देश और विदेश में एक नई पहचान दिलाना भी है। कुंभमेले के आयोजन से शहर में पर्यटन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
साथ ही आने वाले वर्षों में नाशिक के विकास को भी गति देने का प्रयास किया जा रहा है। नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेळा प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह के अनुसार, कुंभमेले को ‘न भूतो न भविष्यति’ स्वरूप देने के लिए विभिन्न स्तरों पर नियोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, बेहतर यातायात व्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचा और नाशिक की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
