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बेटियों के सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बहु-क्षेत्रीय अभियान
केंद्र सरकार ने बताया कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (BBBP) योजना ने देश में बाल लिंगानुपात और लड़कियों के सशक्तिकरण से जुड़े कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। स्वास्थ्य मंत्रालय के HMIS आंकड़ों के अनुसार, जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 के 918 से बढ़कर 2025-26 में 929 (अनंतिम) हो गया है। वहीं, UDISE+ के अनुसार माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 75.51% से बढ़कर 83.4% पहुंच गया है। योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आत्मरक्षा, मासिक धर्म स्वच्छता और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों में बहु-क्षेत्रीय गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
Vindhya Dubey05 अग. 2026, 08:04 PM IST

नई दिल्ली: देश में बेटियों के प्रति सामाजिक सोच बदलने, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने और लड़कियों को शिक्षा एवं समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (BBBP) योजना अब एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। केंद्र सरकार के अनुसार, इस अभियान के सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगे हैं। जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth-SRB) में सुधार हुआ है और माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के स्कूल नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि 22 जनवरी 2015 को शुरू की गई यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना, बालिकाओं का संरक्षण सुनिश्चित करना, उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है।
जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के अनुसार, वर्ष 2014-15 में राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 918 था, जो 2025-26 (अनंतिम) में बढ़कर 929 हो गया है। यह संकेत देता है कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
लड़कियों की शिक्षा में भी बढ़ी भागीदारी
शिक्षा मंत्रालय के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE+) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) वर्ष 2014-15 के 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 83.4 प्रतिशत हो गया है। यह दर्शाता है कि पहले की तुलना में अधिक लड़कियां माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच रही हैं और स्कूल छोड़ने की दर में भी कमी आई है।
क्या है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना?
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में उन जिलों से की गई थी जहां जन्म के समय लिंगानुपात बेहद कम था। बाद में 15वें वित्त आयोग की अवधि में इसे मिशन शक्ति (Mission Shakti) के 'संबल' (Sambal) घटक के तहत पूरे देश के सभी जिलों तक विस्तारित कर दिया गया।
यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती है। योजना का क्रियान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्थानीय स्तर पर किया जाता है।
सिर्फ योजना नहीं, सामाजिक आंदोलन
सरकार का कहना है कि यह अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं रहा, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन बन चुका है। इसमें सरकारी विभागों के अलावा मीडिया, स्वयंसेवी संस्थाएं, पंचायतें, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, धार्मिक एवं सामाजिक संगठन तथा आम नागरिक भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
इसका सबसे बड़ा उद्देश्य समाज की सोच बदलना है ताकि बेटियों को परिवार और समाज में समान सम्मान, अवसर और अधिकार मिल सकें।
ऑपरेशनल मैनुअल से बढ़ी प्रभावशीलता
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 11 अक्टूबर 2022 को 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ऑपरेशनल मैनुअल' जारी किया गया। इसमें जिला स्तर पर पूरे वर्ष चलने वाली गतिविधियों का विषयवार कैलेंडर तैयार किया गया है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और हर महीने बालिकाओं के विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।
शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर क्या हो रहा है?
योजना के तहत स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग एवं कार्यशील शौचालय, जेंडर-संवेदनशील शिक्षा, शिक्षकों का प्रशिक्षण, करियर काउंसलिंग, जीवन कौशल शिक्षा, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तथा विज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विज्ञान मेले, प्रदर्शनियां और एक्सपोजर विजिट आयोजित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर कौन-कौन से प्रयास?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम, पोषण जागरूकता, मासिक धर्म स्वच्छता, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK), स्कूल हेल्थ एंबेसडर पहल, किशोर स्वास्थ्य शिक्षा तथा PCPNDT Act और MTP Act के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में लंबे समय तक कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, शिक्षा में लैंगिक असमानता और बेटियों के प्रति भेदभाव गंभीर सामाजिक चुनौतियां रहे हैं। इन समस्याओं का सीधा असर जन्म के समय लिंगानुपात, महिला साक्षरता, स्वास्थ्य और आर्थिक भागीदारी पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समाज की सोच बदलना भी उतना ही आवश्यक है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' इसी सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित है। यह परिवारों को बेटियों के जन्म को स्वीकार करने, उन्हें शिक्षा दिलाने, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जीवन के हर क्षेत्र में समान अवसर देने के लिए प्रेरित करती है।
क्या होंगे इसके दीर्घकालिक लाभ?
यदि योजना का प्रभाव इसी तरह जारी रहता है तो देश में लिंगानुपात में और सुधार होगा, बाल विवाह एवं स्कूल छोड़ने की घटनाएं कम होंगी, महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में भागीदारी बढ़ेगी तथा आर्थिक विकास में महिलाओं का योगदान और मजबूत होगा। साथ ही लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लक्ष्य हासिल करने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार का मानना है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि भारत में महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने की दीर्घकालिक राष्ट्रीय पहल है। जन्म से लेकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता तक, यह योजना बेटियों को समान अवसर देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
