government
महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था की होगी समीक्षा, 7 सदस्यीय समिति करेगी जांच
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. राधा की अध्यक्षता वाली यह समिति प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम जारी होने तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। समिति पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थी, नकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के गलत इस्तेमाल और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा जैसी चुनौतियों पर भी सुझाव देगी। इसके लिए समिति राज्य के सभी राजस्व संभागों का दौरा कर छात्रों, अभ्यर्थियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों से सीधे सुझाव लेगी।

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरी के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने का फैसला किया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 सितंबर 2026 को 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया। इस समिति का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय, निष्पक्ष और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाना है। यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 12 अगस्त को हुई बैठक के बाद लिया गया। सरकार अब परीक्षा व्यवस्था की उन कमियों को चिन्हित करना चाहती है, जिनकी वजह से पेपर लीक, नकल या दूसरी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती हैं।
प्रश्नपत्र से रिजल्ट तक हर चरण की होगी जांच
समिति केवल प्रश्नपत्र या परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं रहेगी। वह पूरी भर्ती परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच से लेकर अलग-अलग सेट तैयार करने, प्रिंटिंग या डिजिटल वितरण, प्रश्नपत्र की गोपनीयता, सुरक्षित भंडारण और परिवहन जैसे चरण शामिल होंगे। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और सत्यापन, उत्तरों की रिकॉर्डिंग, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी।
पेपर लीक और नकल रोकने पर रहेगा खास जोर
समिति का एक बड़ा काम परीक्षा में होने वाले संभावित गैरकानूनी और अनियमित तरीकों को रोकने के उपाय सुझाना होगा। इसमें पेपर लीक, फर्जी या दूसरे व्यक्ति की जगह परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी, आपसी मिलीभगत और प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल जैसी समस्याएं शामिल हैं। सरकार परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल, परीक्षा केंद्रों के सुरक्षा मानकों और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी समिति की सिफारिशें लेगी। शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
7 सदस्यीय समिति में कौन-कौन शामिल?
समिति की अध्यक्षता सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (सेवाएं) वी. राधा करेंगी। समिति में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, नासिक के विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम, पूर्व संघ लोक सेवा आयोग सदस्य एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) अजीत शंकरराव भोसले और आईआईटी मुंबई के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर श्यामप्रसाद करगड्डे शामिल हैं। डॉ. एन. रामास्वामी को समिति का सदस्य-सचिव बनाया गया है।
छात्रों और अभ्यर्थियों से भी लिए जाएंगे सुझाव
सरकार ने समिति को केवल अधिकारियों और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रखा है। समिति राज्य के हर राजस्व संभाग का दौरा करेगी और वहां छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी। इस दौरान परीक्षा व्यवस्था में आ रही दिक्कतों, सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियों और सुधार के सुझावों को दर्ज किया जाएगा। समिति इन सुझावों के साथ अन्य राज्यों और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की परीक्षा प्रणालियों का भी अध्ययन कर सकती है।
12 सितंबर से शुरू होगा राज्यव्यापी दौरा
उच्चस्तरीय समिति का राज्यव्यापी दौरा 12 सितंबर से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पुणे में समिति सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में छात्रों और अभ्यर्थियों से बातचीत करेगी। इसके बाद अलग-अलग राजस्व संभागों में जाकर परीक्षा प्रणाली से जुड़े लोगों से सुझाव लिए जाएंगे। नागपुर संभाग में समिति 16 सितंबर को छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों, अध्ययन केंद्र संचालकों, शैक्षणिक संस्थानों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करेगी।
सरकार के सामने रखी जाएगी सुधार की रूपरेखा
समिति द्वारा अलग-अलग स्तर से जुटाई गई जानकारी और सुझावों का अध्ययन करने के बाद भर्ती परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों की सिफारिश की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें प्रश्नपत्र की गोपनीयता से लेकर परिणाम जारी होने तक हर चरण में सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार की इस पहल को भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि अंतिम बदलाव समिति की सिफारिशों और सरकार के आगे के फैसलों के बाद ही लागू होंगे।
