railway

रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत, कर्ज चुकाने में लगातार दिखा अनुशासन l

भारतीय रेलवे ने पिछले पांच वर्षों में कर्ज चुकाने और वित्तीय प्रबंधन में स्थिरता बनाए रखी है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को मूलधन और ब्याज का भुगतान नियमित रूप से किया गया है। साथ ही, केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (GBS) में लगातार बढ़ोतरी होने से रेलवे की अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (EBR) पर निर्भरता कम हुई है। सरकार का कहना है कि कोविड-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद रेलवे की ऋण भुगतान व्यवस्था स्थिर बनी रही और बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश जारी रहा।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:31 PM IST
खबर शेयर करें:
रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत, कर्ज चुकाने में लगातार दिखा अनुशासन l

भारतीय रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए कर्ज चुकाने और बुनियादी ढांचे में निवेश के बीच संतुलन स्थापित किया है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, कोविड-19 महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों के बावजूद रेलवे ने अपनी ऋण सेवा (Debt Servicing) को स्थिर बनाए रखा और वित्तीय प्रतिबद्धताओं का समय पर निर्वहन किया। सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि मजबूत वित्तीय प्रबंधन, केंद्र सरकार से बढ़ते बजटीय सहयोग और योजनाबद्ध निवेश का परिणाम है।


रेल मंत्रालय के अनुसार इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) भारतीय रेलवे की बाजार से धन जुटाने वाली प्रमुख वित्तीय संस्था है। इसका मुख्य कार्य रेलवे के लिए रोलिंग स्टॉक (लोकोमोटिव, कोच और वैगन) तथा विभिन्न रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना और उन्हें भारतीय रेलवे को लीज पर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा IRFC बिजली उत्पादन एवं प्रसारण, खनन, ईंधन, कोयला, वेयरहाउसिंग, दूरसंचार, होटल और कैटरिंग जैसे रेलवे से जुड़े क्षेत्रों को भी वित्तीय सहायता प्रदान करता है।


सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में भारतीय रेलवे को ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (GBS) के माध्यम से पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस सहायता का उपयोग नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, विद्युतीकरण, आधुनिक स्टेशन, रोलिंग स्टॉक और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया गया। पहले जिन परियोजनाओं को अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (Extra Budgetary Resources) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता था, अब उनमें सरकारी बजटीय सहायता का हिस्सा बढ़ गया है। इससे रेलवे की उधारी पर निर्भरता कम हुई है और वित्तीय बोझ नियंत्रित रखने में मदद मिली है।


रेलवे मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में रेलवे ने ₹14,192 करोड़ मूलधन और ₹14,510 करोड़ ब्याज का भुगतान किया। वर्ष 2022-23 में मूलधन भुगतान बढ़कर ₹16,922 करोड़ तथा ब्याज भुगतान ₹17,267 करोड़ रहा। इसके बाद 2023-24 में रेलवे ने ₹20,084 करोड़ मूलधन और ₹17,946 करोड़ ब्याज का भुगतान किया। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर क्रमशः ₹23,938 करोड़ और ₹21,630 करोड़ हो गया, जबकि 2025-26 में रेलवे ने ₹24,853 करोड़ मूलधन तथा ₹21,685 करोड़ ब्याज का भुगतान किया। इससे स्पष्ट होता है कि रेलवे लगातार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन कर रहा है।


रेल मंत्रालय का कहना है कि बढ़ते पूंजी निवेश के बावजूद रेलवे की ऋण सेवा प्रणाली पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि कुल लीज भुगतान में ब्याज का अनुपात धीरे-धीरे नियंत्रित हो रहा है, जो बेहतर वित्तीय प्रबंधन और योजनाबद्ध उधारी का संकेत है। इससे रेलवे को भविष्य की परियोजनाओं में अधिक संसाधन निवेश करने की क्षमता मिल रही है। सरकार का मानना है कि मजबूत वित्तीय स्थिति का सीधा लाभ रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्यों में दिखाई दे रहा है। नई रेल लाइनें, समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors), स्टेशन पुनर्विकास, आधुनिक ट्रेनें, रोलिंग स्टॉक का विस्तार और सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं में लगातार निवेश किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि देश के लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।


रेल मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार के बढ़ते बजटीय समर्थन और संतुलित वित्तीय रणनीति के कारण भारतीय रेलवे भविष्य में भी बड़े पैमाने पर अवसंरचना विकास परियोजनाओं को गति देने की स्थिति में है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय रेल नेटवर्क का निर्माण करना है।