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शिक्षकों-कर्मचारियों की शिकायतों के लिए राज्यस्तरीय समिति का गठन l

महाराष्ट्र सरकार ने निजी अनुदानित, आंशिक अनुदानित और गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति का गठन किया है। अब जिला एवं विभागीय शिकायत निवारण समितियों के फैसलों से असंतुष्ट पक्ष राज्य स्तर पर अपील कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य शिकायतों का तेज, पारदर्शी और न्यायपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना तथा न्यायालयों में बढ़ रहे मामलों की संख्या को कम करना है।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:13 PM IST
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शिक्षकों-कर्मचारियों की शिकायतों के लिए राज्यस्तरीय समिति का गठन l

महाराष्ट्र सरकार ने निजी अनुदानित, आंशिक अनुदानित और गैर-अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों तथा शैक्षणिक संस्थाओं को बड़ी राहत देते हुए राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति के गठन का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब यदि किसी शिक्षक, कर्मचारी या संस्था को जिला अथवा संशोधित शिकायत निवारण समिति के निर्णय से असंतोष होगा, तो वे सीधे राज्यस्तरीय समिति के समक्ष अपील कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित शिकायतों का समाधान अधिक तेज़ी, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हो सकेगा।


सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसे विवाद सामने आते थे, जिनका समाधान स्कूल न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं हो पाता था। ऐसे मामलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के पास न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के अलावा कोई प्रभावी विकल्प नहीं बचता था। इससे न्यायालयों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और शिकायतों के निपटारे में लंबा समय लग रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए पहले वर्ष 2024 में संशोधित शिकायत निवारण समितियाँ गठित की गई थीं, लेकिन उनके निर्णयों के विरुद्ध अपील के लिए कोई अलग मंच उपलब्ध नहीं था। अब इस कमी को दूर करते हुए राज्य सरकार ने नई राज्यस्तरीय समिति का गठन किया है।


सरकार ने यह निर्णय मुंबई उच्च न्यायालय और नागपुर खंडपीठ द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया है। न्यायालय ने शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया था। इसी के अनुरूप सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में नई समिति गठित करने का फैसला किया, ताकि विवादों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर ही निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से किया जा सके। नई समिति की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव करेंगे। समिति में विभाग के विभिन्न संयुक्त सचिव और उप सचिव सदस्य होंगे, जबकि संबंधित अवर सचिव या कक्ष अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इससे विभिन्न प्रकार की शिकायतों की सुनवाई विषय विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा की जा सकेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।


राज्यस्तरीय समिति के समक्ष कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होगी। इनमें शिक्षकों और कर्मचारियों की मान्यता अस्वीकृत होने के मामले, स्थानांतरण विवाद, अनुकंपा नियुक्ति, नियुक्ति की पात्रता, शालार्थ आईडी, वेतन सत्यापन, वेतनवृद्धि, वेतनमान, कार्यभार विवाद, पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ, पद समाप्त होने के बाद कर्मचारियों का समायोजन, शिक्षा अधिकारियों के आदेशों के विरुद्ध अपील तथा आयुक्त (शिक्षा) के निर्णयों के खिलाफ दायर प्रकरण शामिल होंगे। इससे अधिकांश प्रशासनिक विवादों का समाधान एक ही मंच पर संभव हो सकेगा।


सरकार ने अपील की स्पष्ट प्रक्रिया भी तय की है। संशोधित शिकायत निवारण समिति के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी या शैक्षणिक संस्था निर्णय प्राप्त होने के 30 कार्य दिवसों के भीतर राज्यस्तरीय समिति के समक्ष लिखित अपील दायर कर सकेगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में समय पर अपील दाखिल नहीं हो पाती है, तो उचित कारणों के आधार पर समिति अधिकतम छह माह तक विलंब को स्वीकार कर सकती है। हालांकि अपील के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।


नई व्यवस्था के तहत समिति शिकायत प्राप्त होने के बाद दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देगी। सुनवाई पूरी होने के बाद समिति छह माह के भीतर कारण सहित अंतिम निर्णय सुनाएगी। निर्णय लेते समय संबंधित अधिनियम, शासनादेश, सरकारी नीतियों, अधिसूचनाओं और न्यायालयों के निर्णयों को आधार बनाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति का निर्णय अंतिम होगा और सभी संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी रहेगा।


सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि समिति के आदेशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों और शिक्षा आयुक्त की जिम्मेदारी होगी। यदि कोई अधिकारी या विद्यालय प्रबंधन आदेशों को लागू करने में लापरवाही करता है या जानबूझकर देरी करता है, तो उसके खिलाफ प्रचलित कानूनों और नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। इस निर्णय को निजी विद्यालयों के शिक्षकों, कर्मचारियों और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। नई अपील व्यवस्था लागू होने से शिकायतों का समाधान अधिक तेज़, पारदर्शी और निष्पक्ष होने की उम्मीद है। साथ ही, न्यायालयों पर बढ़ते मामलों का बोझ कम होगा और शिक्षा प्रशासन में जवाबदेही एवं सुशासन को भी मजबूती मिलेगी।