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सीलमपुर में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, यूट्यूबर गिरफ्तार; POCSO के तहत दर्ज हुआ मामला

दिल्ली के सीलमपुर में एक यूट्यूबर को नाबालिग किशोरी से कथित दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। शिकायत में इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती, शादी का झांसा देकर शोषण, दबाव और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

Anshuman Mishra06 अग. 2026, 03:03 PM IST
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सीलमपुर में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, यूट्यूबर गिरफ्तार; POCSO के तहत दर्ज हुआ मामला


नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में एक नाबालिग किशोरी से कथित दुष्कर्म के मामले में सोशल मीडिया पर सक्रिय एक यूट्यूबर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया है। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले रिश्तों, नाबालिगों की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते जोखिमों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी आरोपी से इंस्टाग्राम के माध्यम से पहचान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने दोस्ती के बाद उससे मुलाकात करनी शुरू की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने पहले उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता रहा।


पीड़िता का यह भी आरोप है कि जब उसने आरोपी के कथित दबाव का विरोध किया तो उसे शादी का भरोसा देकर शांत करने का प्रयास किया गया। बाद में आरोपी ने किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया, लेकिन इसके बावजूद पीड़िता पर संबंध बनाए रखने का दबाव बनाया जाता रहा। शिकायत में मारपीट और जबरन संबंध बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।


पीड़िता द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड तथा सोशल मीडिया चैट की भी जांच कर सकती है।


क्या है POCSO कानून

POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) भारत का विशेष कानून है, जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के तहत नाबालिग की सहमति कानूनी रूप से मान्य नहीं होती। यदि पीड़ित 18 वर्ष से कम आयु का है तो आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला

यह मामला सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग की ओर ध्यान आकर्षित करता है। आज बड़ी संख्या में किशोर और किशोरियां इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नए लोगों से जुड़ते हैं। ऐसे में अभिभावकों की सतर्कता, डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता और बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के बारे में शिक्षित करना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन दोस्ती के नाम पर विश्वास जीतकर शोषण करने के मामलों में डिजिटल साक्ष्य, चैट, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान को गोपनीय रखना भी कानूनन अनिवार्य है।


समाज के लिए संदेश

यदि किसी नाबालिग के साथ यौन अपराध होता है तो परिवार और समाज को बिना देरी किए पुलिस अथवा संबंधित बाल संरक्षण एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए। समय पर शिकायत दर्ज होने से जांच मजबूत होती है और पीड़ित को कानूनी एवं मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। साथ ही, सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतना और निजी जानकारी साझा न करना बेहद आवश्यक है।


ध्यान देने योग्य बात

यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है। आरोपी पर लगाए गए आरोपों का अंतिम सत्य न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही तय होगा। पत्रकारिता के मानकों के अनुसार आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक न्यायालय उसे दोषी घोषित न कर दे।

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