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403 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क बेनकाब, 6 गिरफ्तार

झांसी: पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर करने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक करीब ₹403 करोड़ की संदिग्ध रकम 60 बैंक खातों के जरिए इधर-उधर की गई, जिनमें लगभग 35 खाते झांसी से जुड़े बताए जा रहे हैं। मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है और USDT से जुड़े लेन-देन की भी जांच चल रही है।

Neha Sharma29 अग. 2026, 04:03 PM IST
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403 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क बेनकाब, 6 गिरफ्तार
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़ी रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले एक बड़े कथित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 403 करोड़ रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम देशभर के लगभग 60 बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर की गई। मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

35 बैंक खाते झांसी से जुड़े
प्रेमनगर पुलिस की जांच में सामने आया कि इन 60 खातों में से करीब 35 बैंक खाते झांसी में थे और गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर इन खातों का संचालन कर रहे थे। पुलिस अब इन खातों से हुए लेन-देन की पूरी वित्तीय कड़ी की जांच कर रही है।

साइबर ठगी की रकम को ‘लेयरिंग’ के जरिए घुमाया
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद सीधे लोगों को ठगने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय साइबर ठगों से रकम अपने नियंत्रण वाले बैंक खातों में मंगाते थे। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों और दूसरे माध्यमों से ट्रांसफर किया जाता था, ताकि उसका असली स्रोत छिपाया जा सके और लेन-देन सामान्य या वैध दिखाई दे।
इसके बदले आरोपी कथित तौर पर कमीशन लेते थे और बाकी रकम संबंधित साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। इस तरह बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को आगे भेजने के लिए किया जा रहा था। 

मुख्य आरोपी ने एक साल में कमाए 22 करोड़!
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य आरोपी अरमान झांसी के गरिया फाटक क्षेत्र का रहने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार उसके पिता ई-रिक्शा चलाते थे। पुलिस का दावा है कि अरमान ने साइबर फ्रॉड से जुड़े इस नेटवर्क के जरिए सिर्फ एक साल में करीब 22 करोड़ रुपये कमाए।  मामले में अरमान के अलावा सत्यम वर्मा, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, अभिषेक चौधरी, जॉन पाल और अर्चित श्रीवास्तव के नाम सामने आए हैं। 

USDT में बदली जा रही थी रकम
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों को कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलते हुए पकड़ा। पुलिस के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान ही करीब 9.75 लाख रुपये एक खाते में USDT में बदले गए थे।  

कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से देश के किन-किन राज्यों के साइबर ठग जुड़े हुए हैं। साथ ही बैंक खातों की पूरी श्रृंखला, रकम के ट्रांसफर, कमीशन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और जांच आगे बढ़ने पर और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। 

बड़ी बात क्या है?
इस मामले में खास बात यह है कि जांच केवल साइबर ठगी करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंच रही है जो ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए आगे ट्रांसफर और वैध दिखाने में मदद करते हैं। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।