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EP 2020 के तहत स्वास्थ्य, हाइजीन और पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया, Eco Clubs और School Health Programme से बच्चों को किया जा रहा जागरूक

स्कूली बच्चों में स्वच्छता की आदतों, स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से काम कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बच्चों के समग्र विकास में स्वास्थ्य, कल्याण और पर्यावरण जागरूकता को विशेष महत्व दिया गया है। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और स्कूलों का संचालन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के अंतर्गत आता है, लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा दे रही है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 08:23 PM IST
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EP 2020 के तहत स्वास्थ्य, हाइजीन और पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया, Eco Clubs और School Health Programme से बच्चों को किया जा रहा जागरूक


शिक्षा मंत्रालय ने NEP 2020 के अनुरूप स्कूल पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को शामिल किया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इन विषयों को छात्रों की उम्र और कक्षा के स्तर के अनुसार पाठ्यपुस्तकों और अध्ययन सामग्री में जगह दी है, ताकि बच्चे शुरुआती स्तर से ही स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझ सकें। सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM POSHAN) के तहत देशभर में करीब 10.23 करोड़ छात्रों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना बाल वाटिका से लेकर कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए लगभग 10.33 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू है। योजना के माध्यम से बच्चों को संतुलित आहार, पोषण, जंक फूड के नुकसान, हाथ धोने की आदत, स्वच्छता और स्कूल न्यूट्रिशन गार्डन के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।


समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में मिशन लाइफ के लिए Eco Clubs स्थापित किए जा रहे हैं। इन क्लबों के माध्यम से छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बारे में जागरूक किया जाता है। छात्र पौधारोपण, प्रकृति भ्रमण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की सीख लेते हैं। सरकार स्कूलों में खेल, योग और शारीरिक शिक्षा को भी बढ़ावा दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत खेलों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। समग्र शिक्षा योजना के माध्यम से सरकारी स्कूलों में खेल गतिविधियों, फिटनेस कार्यक्रमों और योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। NCERT ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए खेल और योग आधारित पाठ्यपुस्तकें भी तैयार की हैं, जिनमें बच्चों को शारीरिक शिक्षा, योग और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी जाती है।


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय संयुक्त रूप से वर्ष 2020 से School Health and Wellness Programme चला रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक स्कूल में दो शिक्षकों को Health and Wellness Ambassador के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है, जो छात्रों को पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, किशोरावस्था स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली जैसे 11 विषयों पर जानकारी देते हैं। इसके अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से Environment Education Programme (EEP) भी चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए कार्यशालाएं, प्रतियोगिताएं, प्रकृति शिविर, स्वच्छता अभियान, जीरो वेस्ट पहल, प्लास्टिक मुक्त अभियान, किचन गार्डन और वर्मी कम्पोस्टिंग जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं।


स्कूली बच्चों में फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, राष्ट्रीय योग ओलंपियाड और राष्ट्रीय खेल दिवस जैसी पहल भी संचालित की जा रही हैं। CBSE के Health and Physical Education Programme के तहत सभी कक्षाओं में खेल और योग को अनिवार्य किया गया है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास का माध्यम बनाना है।