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केंद्रीय संस्थानों से बढ़ा भारत का शोध उत्पादन, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 38वें स्थान पर पहुंचा देश

भारत में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध क्षमता बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर बड़ा जोर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) को केवल शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि शोध और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 10:19 PM IST
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केंद्रीय संस्थानों से बढ़ा भारत का शोध उत्पादन, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 38वें स्थान पर पहुंचा देश


शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि देश में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों को लगातार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। पिछले पांच वर्षों यानी वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान IIT, NIT, IIIT, IISER और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे प्रमुख संस्थानों के लिए शिक्षण, शोध और नवाचार गतिविधियों को मजबूत करने के उद्देश्य से 99,494.24 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

NEP 2020 के तहत शोध और नवाचार पर विशेष जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध संस्कृति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नीति के तहत विश्वविद्यालयों और संस्थानों को स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर, तकनीकी विकास केंद्र, अत्याधुनिक शोध केंद्र और उद्योग-अकादमिक साझेदारी विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा मानविकी और सामाजिक विज्ञान समेत विभिन्न क्षेत्रों में बहुविषयक शोध को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गई है। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय संस्थान वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शोध केंद्र के रूप में विकसित हों।

भारत का R&D खर्च हुआ दोगुने से अधिक

भारत में अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) पर होने वाला खर्च पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) वर्ष 2010-11 में 60,196.75 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2020-21 तक बढ़कर 1,27,380.96 करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि भारत में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ते निवेश को दर्शाती है। सरकार का कहना है कि शोध में बढ़ता निवेश नई तकनीकों के विकास, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर भारत की शोध क्षमता में सुधार

पिछले एक दशक में भारत के शोध क्षेत्र ने वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) में भारत की रैंकिंग वर्ष 2015 में 81वें स्थान पर थी, जो 2025 में सुधार के साथ 38वें स्थान पर पहुंच गई। अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) के अनुसार, विज्ञान और इंजीनियरिंग शोध प्रकाशनों के मामले में भारत वर्ष 2022 में दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा। वर्ष 2010 में भारत इस क्षेत्र में सातवें स्थान पर था। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के आंकड़ों के अनुसार, पेटेंट आवेदन की संख्या में भी भारत ने सुधार किया है। वर्ष 2022 में भारत दुनिया में छठे स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2013 में भारत आठवें स्थान पर था।

इसके अलावा विज्ञान और इंजीनियरिंग विषयों में PhD डिग्री प्राप्त करने वाले शोधार्थियों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित हो रहा शोध

केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों में अब पारंपरिक शोध के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रमुख शोध क्षेत्रों में शामिल हैं-

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • सुपरकंप्यूटिंग
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
  • सेमीकंडक्टर तकनीक
  • एडवांस्ड मैटेरियल्स
  • मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर
  • अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक
  • दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण खनिज
  • ब्लू इकोनॉमी

इन क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देकर भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

PM रिसर्च फेलोशिप से प्रतिभाशाली छात्रों को अवसर

उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 में प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रतिभाशाली छात्रों को भारत के प्रमुख शोध संस्थानों में उच्च स्तरीय अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत शोधार्थियों को बेहतर फेलोशिप और रिसर्च ग्रांट उपलब्ध कराया जाता है। PMRF योजना के लिए कुल 1,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है और अब तक 3,688 शोधार्थियों को इस योजना के तहत प्रवेश दिया जा चुका है।

ANRF से मिलेगा शोध को नया आधार

देश में शोध और नवाचार को नई दिशा देने के लिए सरकार ने फरवरी 2024 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की। ANRF अधिनियम 2023 के तहत स्थापित इस संस्था के लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में रणनीतिक शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। ANRF में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे उद्योग और शोध संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत हो सकेगा।

एक लाख करोड़ रुपये की RDI योजना से बढ़ेगी शोध क्षमता

सरकार ने 3 नवंबर 2025 को रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) योजना शुरू की। इस योजना के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य देश में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को मजबूत करना, निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना और नई तकनीकों के विकास को गति देना है।

PhD शोधार्थियों के लिए फेलोशिप और सहायता

UGC की ओर से NET-JRF जैसी योजनाओं के माध्यम से छात्रों को उच्च शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों और संस्थाओं द्वारा भी PhD शोधार्थियों को फेलोशिप प्रदान की जाती है। सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन और एकल बालिका शोधार्थियों के लिए विशेष फेलोशिप योजनाएं भी शुरू की हैं। PhD छात्र विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित शोध परियोजनाओं में भाग लेकर अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं।

भारत को वैश्विक शोध केंद्र बनाने की तैयारी

केंद्र सरकार का कहना है कि बढ़ते निवेश, नई योजनाओं और संस्थागत सुधारों के माध्यम से भारत का शोध पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। IIT, NIT, IISc और अन्य केंद्रीय संस्थानों में हो रहे शोध से देश को स्वास्थ्य, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करने में मदद मिल रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक स्तर पर विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रमुख केंद्रों में शामिल करना है।