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भोजपुरी लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच, यूपी सरकार ने महोत्सव के लिए जारी की वित्तीय स्वीकृति
उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 अगस्त 2026 को लखनऊ के विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले 42वें भोजपुरी महोत्सव के लिए 6.45 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि से प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी, लोकगायक गोपाल राय और सुरेश प्रसाद कुशवाहा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भोजपुरी भाषा, लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना है। शासनादेश के अनुसार सभी भुगतान निर्धारित वित्तीय नियमों और सत्यापित बिलों के आधार पर किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने भोजपुरी भाषा, लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 8 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले 42वें भोजपुरी महोत्सव के लिए 6.45 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। संस्कृति विभाग द्वारा 6 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार यह राशि लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह (लोक निर्माण विभाग मुख्यालय) में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत की गई है। महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य भोजपुरी लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
शासनादेश के अनुसार इस महोत्सव में देश की प्रसिद्ध भोजपुरी लोक एवं पार्श्व गायिका कल्पना पटवारी मुख्य आकर्षण होंगी। उनके प्रस्तुतीकरण के लिए 5 लाख रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा बलिया के लोकगायक गोपाल राय को 1 लाख रुपये तथा लखनऊ के लोक कलाकार सुरेश प्रसाद कुशवाहा को 45 हजार रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है। इन तीनों कलाकारों के मानदेय सहित कुल 6.45 लाख रुपये की राशि सरकार द्वारा अनुमोदित की गई है।
कल्पना पटवारी भोजपुरी लोक संगीत की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित गायिका हैं और उन्होंने भोजपुरी के साथ-साथ असमिया, हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनेक गीत गाए हैं। उन्हें भोजपुरी लोक संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाले प्रमुख कलाकारों में गिना जाता है। ऐसे में उनके इस महोत्सव में शामिल होने से कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा और आकर्षण दोनों बढ़ने की संभावना है। यह जानकारी उनके सार्वजनिक सांस्कृतिक योगदान पर आधारित सामान्य पृष्ठभूमि है।
भोजपुरी महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भोजपुरी भाषा और उससे जुड़ी लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ देश के अनेक राज्यों तथा विदेशों में रहने वाले करोड़ों लोग भोजपुरी भाषा बोलते और समझते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से सरकार क्षेत्रीय भाषाओं और लोक संस्कृति के संरक्षण का संदेश देती है।
| क्रमांक | कलाकार का नाम | शहर | श्रेणी | प्रस्तुति | मानदेय |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Kalpana Patowary | मुंबई | अतिविशिष्ट श्रेणी (प्रथम) | भोजपुरी गायन | ₹5,00,000 |
| 2 | Gopal Rai | बलिया | विशिष्ट श्रेणी (प्रथम) | भोजपुरी लोक गायन | ₹1,00,000 |
| 3 | Suresh Prasad Kushwaha | लखनऊ | बी हाई श्रेणी (द्वितीय) | लोक गायन | ₹45,000 |
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत धनराशि केवल इसी कार्यक्रम के लिए उपयोग की जाएगी और इसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। कलाकारों का भुगतान वास्तविक बिल एवं वाउचर के आधार पर किया जाएगा। कार्यक्रम का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा तथा सभी वित्तीय नियमों, बजट प्रावधानों और शासनादेशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। संस्कृति निदेशालय को कार्यक्रम के संचालन, भुगतान और वित्तीय अनुशासन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि कलाकारों के मानदेय और यात्रा व्यय का भुगतान पूर्व निर्धारित शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा। किसी भी प्रकार का भुगतान तभी होगा जब संबंधित बिलों और अभिलेखों का परीक्षण पूरा हो जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्यक्रम के लिए स्वीकृत बजट का उपयोग केवल स्वीकृत मदों में ही किया जाए।
इस आयोजन का महत्व केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। ऐसे महोत्सव क्षेत्रीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराते हैं, लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाते हैं। कार्यक्रम के दौरान होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं। इसके साथ ही युवा कलाकारों को वरिष्ठ कलाकारों के साथ मंच साझा करने का अवसर मिलता है, जिससे लोक कला की परंपरा आगे बढ़ती है।
भोजपुरी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में अभी शामिल नहीं है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान अत्यंत व्यापक है। भारत के अलावा मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, गुयाना और नेपाल सहित कई देशों में बड़ी संख्या में भोजपुरी भाषी समुदाय निवास करता है। ऐसे में इस प्रकार के सरकारी आयोजन भारतीय लोक संस्कृति की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करने का कार्य करते हैं। यह पृष्ठभूमि भोजपुरी भाषा के व्यापक सांस्कृतिक महत्व पर आधारित सामान्य जानकारी है।
हालांकि शासनादेश में कार्यक्रम के विस्तृत सांस्कृतिक कार्यक्रम, मुख्य अतिथि, उद्घाटनकर्ता अथवा कलाकारों के किसी आधिकारिक बयान का उल्लेख नहीं किया गया है। न ही मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्री या किसी अन्य जनप्रतिनिधि की कोई टिप्पणी इस दस्तावेज में शामिल है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार केवल आयोजन के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, कलाकारों के मानदेय और कार्यक्रम के संचालन से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
