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रिकॉर्ड घाटे के बाद एयर इंडिया ने टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस से मांगी ₹14,355 करोड़ की फंडिंग l
एयर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹14,355 करोड़ की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है। रॉयटर्स से बातचीत करने वाले दो सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन को इस पूंजी की तत्काल जरूरत है और रकम एकमुश्त देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से भी दी जा सकती है। यह मांग ऐसे समय की गई है, जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से 2.33 अरब डॉलर यानी करीब ₹22,180 करोड़ का रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया है। फंडिंग को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
Kashish Rai27 अग. 2026, 07:40 PM IST

एयर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹14,355 करोड़ बताई जा रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन को कारोबार और टर्नअराउंड योजना को आगे बढ़ाने के लिए इस पूंजी की तत्काल जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित फंडिंग एकमुश्त देने के बजाय किस्तों या चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है और टाटा संस या सिंगापुर एयरलाइंस की ओर से फंडिंग को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। प्रस्तावित निवेश को आगे बढ़ाने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में योगदान करना होगा। दोनों सूत्रों ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी है, क्योंकि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे।
टाटा के अधिग्रहण के बाद बड़ी फंडिंग मांग
टाटा ग्रुप ने वर्ष 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। इसके बाद एयरलाइन को दोबारा मजबूत बनाने के लिए व्यापक बदलावों की योजना बनाई गई। इस योजना में पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, नए विमानों को बेड़े में शामिल करना, नेटवर्क का विस्तार और संचालन व्यवस्था में सुधार जैसे कदम शामिल हैं। नई फंडिंग की मांग टाटा ग्रुप के नियंत्रण में आने के बाद एयर इंडिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से सामने आई फंडिंग जरूरतों में से एक मानी जा रही है। टर्नअराउंड योजना के तहत एयरलाइन को बड़े स्तर पर पूंजी निवेश करना है, लेकिन बढ़ते घाटे और परिचालन चुनौतियों के कारण इस योजना की लागत और समय दोनों बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
एयरलाइन को कई मोर्चों पर नुकसान
एयर इंडिया के परिचालन पर कई बाहरी परिस्थितियों का भी असर पड़ा है। भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों से उड़ान मार्ग और परिचालन प्रभावित हुआ। पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने भी एयरलाइन के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया। इसके अलावा, पिछले वर्ष हुए घातक विमान हादसे का असर भी एयर इंडिया को झेलना पड़ा। इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान गई थी। इन घटनाओं ने एयरलाइन के संचालन, यात्रियों के भरोसे और वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला।
टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एयर इंडिया को पूरी तरह बदलने और मजबूत स्थिति में लाने में 10 साल तक का समय लग सकता है। उनके अनुसार, एयरलाइन को पुराने सिस्टम, कार्य संस्कृति, सप्लाई चेन और विमान बेड़े में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। एयरलाइन लागत कम करने के उपायों पर भी काम कर रही है। रॉयटर्स ने पहले रिपोर्ट किया था कि टाटा ग्रुप एयरबस और बोइंग से दिए गए सैकड़ों विमानों के ऑर्डर की डिलीवरी को आगे खिसकाने पर विचार कर रहा है, ताकि खर्च और पूंजी पर दबाव को नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल एयर इंडिया की नई फंडिंग मांग पर बातचीत जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह रकम एयरलाइन की तत्काल नकदी जरूरतों, परिचालन खर्च और टर्नअराउंड योजना को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल की जा सकती है। हालांकि, फंडिंग का अंतिम आकार, समय और दोनों शेयरधारकों का योगदान अभी तय नहीं हुआ है।
रिकॉर्ड घाटे के बाद फंडिंग की जरूरत
एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से 2.33 अरब डॉलर यानी करीब ₹22,180 करोड़ का घाटा दर्ज किया। यह दोनों एयरलाइंस का रिकॉर्ड वार्षिक नुकसान बताया जा रहा है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह घाटा दोगुने से भी अधिक है। इतने बड़े घाटे के बाद एयर इंडिया की वित्तीय जरूरतें बढ़ गई हैं। नई इक्विटी फंडिंग की मांग से संकेत मिलता है कि एयरलाइन की ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड योजना पर खर्च का दबाव बढ़ रहा है। कंपनी को अपने परिचालन, विमानों, कर्मचारियों, तकनीकी व्यवस्था और नेटवर्क विस्तार से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ रही है। रॉयटर्स के सवालों पर एयर इंडिया और टाटा संस ने इस प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं की। सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एयर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम को समर्थन दे रही है, लेकिन उसने एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से 2.33 अरब डॉलर यानी करीब ₹22,180 करोड़ का घाटा दर्ज किया। यह दोनों एयरलाइंस का रिकॉर्ड वार्षिक नुकसान बताया जा रहा है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह घाटा दोगुने से भी अधिक है। इतने बड़े घाटे के बाद एयर इंडिया की वित्तीय जरूरतें बढ़ गई हैं। नई इक्विटी फंडिंग की मांग से संकेत मिलता है कि एयरलाइन की ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड योजना पर खर्च का दबाव बढ़ रहा है। कंपनी को अपने परिचालन, विमानों, कर्मचारियों, तकनीकी व्यवस्था और नेटवर्क विस्तार से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ रही है। रॉयटर्स के सवालों पर एयर इंडिया और टाटा संस ने इस प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं की। सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एयर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम को समर्थन दे रही है, लेकिन उसने एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
टाटा के अधिग्रहण के बाद बड़ी फंडिंग मांग
टाटा ग्रुप ने वर्ष 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। इसके बाद एयरलाइन को दोबारा मजबूत बनाने के लिए व्यापक बदलावों की योजना बनाई गई। इस योजना में पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, नए विमानों को बेड़े में शामिल करना, नेटवर्क का विस्तार और संचालन व्यवस्था में सुधार जैसे कदम शामिल हैं। नई फंडिंग की मांग टाटा ग्रुप के नियंत्रण में आने के बाद एयर इंडिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से सामने आई फंडिंग जरूरतों में से एक मानी जा रही है। टर्नअराउंड योजना के तहत एयरलाइन को बड़े स्तर पर पूंजी निवेश करना है, लेकिन बढ़ते घाटे और परिचालन चुनौतियों के कारण इस योजना की लागत और समय दोनों बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
एयरलाइन को कई मोर्चों पर नुकसान
एयर इंडिया के परिचालन पर कई बाहरी परिस्थितियों का भी असर पड़ा है। भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों से उड़ान मार्ग और परिचालन प्रभावित हुआ। पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने भी एयरलाइन के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया। इसके अलावा, पिछले वर्ष हुए घातक विमान हादसे का असर भी एयर इंडिया को झेलना पड़ा। इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान गई थी। इन घटनाओं ने एयरलाइन के संचालन, यात्रियों के भरोसे और वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला।
टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एयर इंडिया को पूरी तरह बदलने और मजबूत स्थिति में लाने में 10 साल तक का समय लग सकता है। उनके अनुसार, एयरलाइन को पुराने सिस्टम, कार्य संस्कृति, सप्लाई चेन और विमान बेड़े में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। एयरलाइन लागत कम करने के उपायों पर भी काम कर रही है। रॉयटर्स ने पहले रिपोर्ट किया था कि टाटा ग्रुप एयरबस और बोइंग से दिए गए सैकड़ों विमानों के ऑर्डर की डिलीवरी को आगे खिसकाने पर विचार कर रहा है, ताकि खर्च और पूंजी पर दबाव को नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल एयर इंडिया की नई फंडिंग मांग पर बातचीत जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह रकम एयरलाइन की तत्काल नकदी जरूरतों, परिचालन खर्च और टर्नअराउंड योजना को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल की जा सकती है। हालांकि, फंडिंग का अंतिम आकार, समय और दोनों शेयरधारकों का योगदान अभी तय नहीं हुआ है।
