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फुटवियर नीति-2025 से उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक विनिर्माण केंद्र, 22 लाख नए रोजगार के सृजन का लक्ष्य

लखनऊ: प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश को फुटवियर, लेदर और नॉन-लेदर उत्पादों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाने के लिए 'फुटवियर, लेदर एवं नॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025' लागू कर दी है। इस नीति का मुख्य जोर निवेश, निर्यात, रोजगार सृजन, कौशल विकास और तकनीकी उन्नयन पर है, जिसके जरिए सरकार की मंशा इस क्षेत्र में करीब 22 लाख नए रोजगार पैदा करने की है।

Vinod Tiwari08 अग. 2026, 04:56 PM IST
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फुटवियर नीति-2025 से उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक विनिर्माण केंद्र, 22 लाख नए रोजगार के सृजन का लक्ष्य

विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा

इस नीति के तहत केवल पारंपरिक जिलों जैसे आगरा, कानपुर और उन्नाव तक ही सीमित न रहकर, बल्कि पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा। इस क्षेत्र को गति देने के लिए अनुपूरक बजट में एक लाख रुपये का प्रतीकात्मक प्रावधान किया गया है तथा आवश्यकता पड़ने पर अन्य मदों से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में यह उद्योग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है, जबकि इसके निर्यात का दायरा भी काफी बड़ा है।


आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सहायक इकाइयों को प्रोत्साहन

फुटवियर निर्माण में उपयोग होने वाले 32 प्रकार के कंपोनेंट्स में से ज्यादातर का आयात चीन से किया जाता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए लेदर और नॉन-लेदर फुटवियर के साथ-साथ बकल, जिप, सोल, इनसोल, लेस, हील, धागा, टैग, लेबल, रसायन और रंग बनाने वाली सहायक इकाइयों के साथ-साथ फुटवियर एवं लेदर मशीनरी निर्माण इकाइयों को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।

आर्थिक सहायता और वित्तीय अनुदान के मुख्य बिंदु

  •  सरकार द्वारा समर्पित लेदर पार्क, साझा सुविधा केंद्र, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, प्रशिक्षण केंद्र और कम से कम 10 उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जाएंगे।
  •  मेगा एंकर इकाइयों को अधिकतम एक हजार करोड़ रुपये तथा क्लस्टर्स को 1,500 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
  •  पूर्वांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में भूमि लागत पर मेगा एंकर इकाइयों एवं क्लस्टर्स को 80 प्रतिशत, जबकि अन्य पात्र इकाइयों को 35 प्रतिशत तक का अनुदान मिलेगा।
  •  रोजगार बढ़ाने वाली इकाइयों के लिए पांच वर्ष तक नियोक्ता के ईपीएफ (EPF) अंशदान की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
  •  प्रशिक्षण के लिए सामान्य अभ्यर्थियों को अधिकतम 15 हजार रुपये और महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति व दिव्यांगों के लिए 20 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
  •  एक हजार से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों को पांच वर्ष तक प्रति यूनिट बिजली पर दो रुपये की सहायता भी दी जाएगी।