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नकोडा लिमिटेड मामला: 394 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्ति बैंकों को वापस मिलेगी, कोर्ट ने दिया आदेश
मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक बड़े मामले में मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने बड़ी राहत देते हुए नकोडा लिमिटेड की 393.79 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्तियों को 'बोनफाइड लेजिटिमेट क्लेमेंट' (बैंकों/लेनदारों) को वापस करने का आदेश दिया है। इस फैसले से बैंकों को फंसे हुए धन की रिकवरी में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

ईडी के सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने नकोडा लिमिटेड और उसके प्रमोटरों, बाबूलाल गुमानमल जैन और देवेंद्र बाबूलाल जैन, के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की थी। आरोप है कि कंपनी ने एक सुनियोजित साजिश के तहत केनरा बैंक के नेतृत्व में 13 बैंकों के कंसोर्टियम को लगभग 828 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने वेंडरों के साथ मिलकर फर्जी बिल और इनवॉइस के आधार पर लेटर्स ऑफ क्रेडिट (LCs) खुलवाए। सामान की आपूर्ति न होने के बावजूद इन बिलों को डिस्काउंट कराया गया। कुल 1,212 एलसी में से 202 इनलैंड एलसी का भुगतान न होने के कारण बैंक को 827.98 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।
ईडी ने संपत्ति की थी कुर्क
इस धोखाधड़ी के बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई करते हुए 2018 में 375.71 करोड़ और 2019 में 18.08 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया था। बाद में, इन संपत्तियों को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा पुष्टि भी कर दी गई थी। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) भी दाखिल की थी।
कैसे मिली संपत्तियों को मुक्ति?
नकोडा लिमिटेड के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद में कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हुआ था, जो बाद में लिक्विडेशन (परिसमापन) की प्रक्रिया में बदल गया। लिक्विडेटर ने विशेष अदालत में इन संपत्तियों को बहाल करने के लिए आवेदन दिया था।
न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान, ईडी ने इस बात पर सहमति जताई कि पीएमएलए का मूल उद्देश्य अपराध की आय (PoC) को वास्तविक हकदारों तक पहुँचाना है। ईडी की इस 'नो ऑब्जेक्शन' के बाद, विशेष अदालत ने 4 अगस्त, 2026 को इन संपत्तियों को लिक्विडेटर को सौंपने का आदेश दिया, ताकि उन्हें वैध लेनदारों में वितरित किया जा सके।
