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द फिफ्थ स्पेस': तकनीक की आलोचना करने के बजाय बच्चों की बात समझें अभिभावक और शिक्षक— केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार

नई दिल्ली: केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि तेजी से बदलते डिजिटल दौर में माता-पिता, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को युवाओं के साथ तकनीक के इस्तेमाल की आलोचना करने के बजाय समझ और सहानुभूति के साथ जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी की चिंताओं को सुनने, समझने और ऐसा माहौल बनाने पर बल दिया जहां बच्चे अपनी चुनौतियों और विचारों को बिना किसी झिझक के साझा कर सकें।

Vinod Tiwari25 अग. 2026, 05:15 PM IST
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द फिफ्थ स्पेस': तकनीक की आलोचना करने के बजाय बच्चों की बात समझें अभिभावक और शिक्षक— केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार

 केंद्रीय मंत्री नई दिल्ली स्थित डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में आयोजित 'द फिफ्थ स्पेस - व्हेयर एजुकेशन मीट्स रिस्पॉन्सिबिलिटी' कार्यक्रम में स्कूली छात्रों को संबोधित कर रहे थे।

'दृष्टि से अंतर्दृष्टि' की ओर बढ़ने की जरूरत

संबोधन के दौरान डॉ. वीरेंद्र कुमार ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच मजबूत भावनात्मक जुड़ाव की अहमियत समझाई, जिससे बच्चों को कठिन समय में उचित मार्गदर्शन और सहारा मिल सके। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की व्यक्तिगत शक्तियों, आकांक्षाओं और जरूरतों को पहचानना जरूरी है। उन्होंने केवल चीजों को सतही तौर पर देखने के बजाय गहराई से समझने यानी "दृष्टि से अंतर्दृष्टि" की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

क्या है 'फिफ्थ स्पेस' की अवधारणा?

केंद्रीय मंत्री ने 'फिफ्थ स्पेस' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह घर, स्कूल, संस्कृति, समाज, नागरिकता, ज्ञान और डिजिटल दुनिया के सुंदर समन्वय का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि डिजिटल परिवेश में पल-बढ़ रहे युवाओं के पास तकनीक के साथ-साथ मजबूत नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता भी होनी चाहिए।

छात्रों ने सीधे पूछे सवाल, दूर हुआ 'जनरेशन गैप'

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और विद्यार्थियों के बीच सीधा संवाद सत्र आयोजित किया गया, जहां बच्चों ने खुलकर अपने सवाल रखे और अपने विचार साझा किए। डॉ. कुमार ने छात्रों को देश के भविष्य निर्माण में अपनी भूमिका के प्रति सजग, जिम्मेदार और जिज्ञासु बने रहने के लिए प्रेरित किया। संवाद ने स्पष्ट किया कि सहानुभूति और बातचीत के जरिए दो पीढ़ियों के बीच के अंतर (जनरेशन गैप) को आसानी से पाटा जा सकता है।

कई प्रमुख हस्तियों ने रखी अपनी बात

इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा DAIC, यूनेस्को (UNESCO) नई दिल्ली और माउंट आबू पब्लिक स्कूल के सहयोग से किया गया था।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने बाल अधिकारों, बाल सुरक्षा, लैंगिक समानता, मानवीय गरिमा और डिजिटल जिम्मेदारी जैसे अहम विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष सुश्री विजया किशोर रहाटकर और माउंट आबू पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. ज्योति अरोड़ा भी उपस्थित रहीं।