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अगत्ती में Fisheries Programme, उपराष्ट्रपति ने दिया बड़ा संदेश
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने लक्षद्वीप के अगत्ती में Fisheries Outreach Programme में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने Sustainable Fishing, मछुआरा कल्याण और Blue Economy को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ जारी किया और लक्षद्वीप की समुद्री मत्स्य क्षमता का वैज्ञानिक एवं टिकाऊ इस्तेमाल करने की बात कही।

अगत्ती, लक्षद्वीप: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन लक्षद्वीप के अगत्ती में आयोजित Fisheries Outreach Programme में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग की ओर से किया गया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने ‘Mission Rangeen Machhli 2031’ जारी किया, जो सजावटी मत्स्य पालन (Ornamental Fisheries Development) के लिए रणनीतिक कार्ययोजना है।
टिकाऊ मत्स्य पालन पर उपराष्ट्रपति का जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने सतत और जिम्मेदार मत्स्य पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र ने हजारों वर्षों से मानव जीवन को पोषण दिया है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मछुआरा समुदाय से मत्स्य पालन से जुड़े संरक्षण नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने अवैध, बिना सूचना और अनियमित मछली पकड़ने (Illegal, Unreported and Unregulated Fishing) के खिलाफ सख्ती और संरक्षण उपायों के पालन को महत्वपूर्ण बताया।
ब्लू इकोनॉमी में लक्षद्वीप की बड़ी भूमिका
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में मत्स्य पालन समुदाय की अहम भूमिका है। उन्होंने मछली पकड़ने को केवल पारंपरिक रोजगार के रूप में देखने के बजाय इसे विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक बाजार से जुड़ा आधुनिक क्षेत्र बनाने पर जोर दिया। उन्होंने लक्षद्वीप को देश की ब्लू इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उनके अनुसार, लक्षद्वीप के आसपास भारत के Exclusive Economic Zone (EEZ) का करीब एक-छठा हिस्सा आता है, जिससे यहां समुद्री संसाधनों और मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं।
लक्षद्वीप में एक लाख टन से ज्यादा मत्स्य क्षमता
उपराष्ट्रपति के अनुसार, लक्षद्वीप में मत्स्य उत्पादन की संभावित क्षमता एक लाख टन से अधिक आंकी गई है। इसमें करीब 94 हजार टन टूना और टूना जैसी प्रजातियों की संभावित क्षमता शामिल है। इन मछलियों की जापान समेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग है। उन्होंने कहा कि इस क्षमता का इस्तेमाल वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि इसका सीधा लाभ द्वीपों के स्थानीय मछुआरा समुदायों को मिल सके।
मछुआरों तक सीधे पहुंच रही सरकारी योजनाएं
कार्यक्रम में मछली पालन क्षेत्र से जुड़े लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ भी प्रदान किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार अब योजनाओं और सहायता को मछुआरा समुदाय तक सीधे पहुंचाने पर जोर दे रही है, ताकि लोगों को सरकारी मदद के लिए बार-बार अधिकारियों के पास जाने की जरूरत न पड़े। उन्होंने तकनीक आधारित व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताया। डिजिटल ऑथराइजेशन सिस्टम, नावों की ट्रैकिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन जैसे उपायों से भारतीय समुद्री उत्पादों को वैश्विक बाजारों में बेहतर स्वीकार्यता दिलाने में मदद मिल सकती है।
लक्षद्वीप में ₹62 करोड़ से ज्यादा की मत्स्य परियोजनाएं
कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत लक्षद्वीप में मत्स्य पालन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ₹62 करोड़ से अधिक के कुल परिव्यय को मंजूरी दी गई है। इन पहलों का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत करना है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक
उपराष्ट्रपति ने भारत के मत्स्य क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान देता है। मत्स्य क्षेत्र से लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत का समुद्री खाद्य उत्पाद 120 से अधिक देशों तक पहुंचता है और पिछले वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य निर्यात ₹73,000 करोड़ से अधिक रहा।
‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का महत्व
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ रहा। यह सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्ययोजना है। इसका उद्देश्य सजावटी मछलियों से जुड़े क्षेत्र को व्यवस्थित तरीके से विकसित करना और इस क्षेत्र में उपलब्ध आर्थिक संभावनाओं का इस्तेमाल करना है। कुल मिलाकर, अगत्ती में आयोजित यह कार्यक्रम ब्लू इकोनॉमी, टिकाऊ मत्स्य पालन, मछुआरा कल्याण और समुद्री संसाधनों के वैज्ञानिक इस्तेमाल को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने लाता है। लक्षद्वीप में मौजूद विशाल समुद्री संसाधनों को स्थानीय समुदायों की आय और देश के समुद्री खाद्य निर्यात से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
