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अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर फिर भड़का: 50% अमेरिकी टैरिफ लागू, कार्नी ने वार्ता रोकी और दिया ‘डॉलर-फॉर-डॉलर’ जवाब
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव 22 अगस्त 2026 को एक नए और गंभीर चरण में पहुंच गया। दोनों देशों के बीच कई दिनों से चल रही गहन व्यापार वार्ता किसी समझौते के बिना खत्म हो गई। इसके बाद अमेरिका ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया। जवाब में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को निलंबित कर दिया और कहा कि कनाडा अमेरिकी शुल्क का “डॉलर-फॉर-डॉलर” आधार पर जवाब देगा।

अमेरिका और कनाडा ( America and Canada) के बीच पिछले कई महीनों से टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर विवाद चल रहा है। अमेरिका पहले ही कनाडा के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अलग-अलग शुल्क लगा चुका था। जुलाई में अमेरिकी प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों के एक बड़े समूह पर 50% नया टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों देशों ने बातचीत तेज की ताकि नए शुल्क को रोका जा सके। 18 अगस्त को प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा था कि बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है और अमेरिका ने 50% टैरिफ लागू करने की समयसीमा 21 अगस्त के अंत तक टाल दी है।लेकिन अंतिम समय में दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।
20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ
22 अगस्त को अमेरिका ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई उत्पादों पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। Reuters के मुताबिक, इन उत्पादों का मूल्य कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 5% है। यानी यह कनाडा के पूरे निर्यात पर लागू शुल्क नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव काफी बड़ा है।इन शुल्कों के दायरे में कुछ ऐसे उत्पाद भी हैं जो दोनों देशों के बीच रोजमर्रा के व्यापार का हिस्सा हैं। रिपोर्टों में लकड़ी के हॉकी स्टिक सहित कई कनाडाई उत्पादों का उल्लेख किया गया है।
कार्नी ने बातचीत क्यों रोकी?
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के अनुसार, बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई थी, लेकिन अमेरिका की ओर से अंतिम चरण में प्रस्तावों और शर्तों में बदलाव किए गए।कनाडा ने इन बदलावों को अनुचित माना। इसके बाद कार्नी ने कनाडाई वार्ताकारों को बातचीत से वापस बुलाने और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता निलंबित करने का फैसला किया। कार्नी ने यह भी संकेत दिया कि कनाडा अब अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों को पहले की तरह नहीं देखता। उनका कहना है कि अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को बदल रहा है और कनाडा को अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक स्वतंत्र तथा मजबूत बनाने की जरूरत है।
कनाडा का ‘डॉलर-फॉर-डॉलर’ जवाब क्या है?
कार्नी का “डॉलर-फॉर-डॉलर” बयान इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मतलब है कि अमेरिका जितने मूल्य के अतिरिक्त टैरिफ से कनाडाई उत्पादों को प्रभावित करेगा, कनाडा भी जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर लगभग उसी आर्थिक मूल्य का अतिरिक्त शुल्क लगाने की दिशा में जाएगा।
यानी यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच जवाबी टैरिफ की नई श्रृंखला शुरू होने का संकेत है।
अमेरिका का पक्ष क्या है?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कनाडा के साथ व्यापार में लंबे समय से कुछ ऐसी नीतियां हैं जिनसे अमेरिकी कंपनियों और उत्पादों को नुकसान होता है। अमेरिकी पक्ष ने कनाडा की ओर से कुछ अमेरिकी वस्तुओं के बाजार तक पहुंच, खासकर शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी जैसे क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि बातचीत के अंतिम चरण में कनाडा ने अतिरिक्त रियायतों की मांग की। दूसरी ओर कनाडा का कहना है कि अमेरिका ने अंतिम समय में अपनी शर्तों में बदलाव किया। इसलिए दोनों देशों के बीच वार्ता टूटने की जिम्मेदारी को लेकर भी मतभेद हैं।
पहले समझौते की उम्मीद क्यों बनी थी?
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले तक दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब दिखाई दे रहे थे।
18 अगस्त को अमेरिका ने टैरिफ को कुछ दिनों के लिए टाल दिया था। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस समय कहा था कि दोनों देशों के बीच गहन बातचीत चल रही है और महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसके अलावा, बातचीत में स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर शुल्क कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई थी।
लेकिन 21 अगस्त की समयसीमा तक अंतिम समझौता नहीं हो पाया।
USMCA पर भी बढ़ा दबाव
इस विवाद का सबसे बड़ा दीर्घकालिक असर अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच मौजूद USMCA/CUSMA व्यापार समझौते पर पड़ सकता है।
तीनों देशों के बीच यह समझौता उत्तर अमेरिकी व्यापार को स्थिरता देने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन लगातार नए टैरिफ और जवाबी शुल्क इस व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं और भविष्य में समझौते के नवीनीकरण को और मुश्किल बना सकते हैं। Reuters और AP दोनों ने मौजूदा घटनाक्रम को USMCA के भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है।
आम लोगों और कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?
टैरिफ का सीधा असर सिर्फ सरकारों पर नहीं पड़ता। कंपनियां अक्सर आयात पर लगने वाली अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा अपने ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।
इससे:
- आयातित सामान महंगा हो सकता है।
- कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
- दोनों देशों की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती हैं।
- कनाडाई कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है।
- अमेरिकी कंपनियों के लिए भी कनाडाई बाजार में लागत बढ़ सकती है।
- लंबे समय तक विवाद रहने पर निवेश और रोजगार पर दबाव पड़ सकता है।
AP के अनुसार, दोनों देशों में कारोबार और उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत को लेकर चिंता जताई जा रही है।
कनाडा अब क्या करेगा?
कनाडा ने फिलहाल बातचीत निलंबित कर दी है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। कार्नी सरकार का कहना है कि वह कनाडाई कर्मचारियों, किसानों और कारोबारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी। साथ ही कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिका पर कम निर्भर बनाने और दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
कनाडा पहले ही अमेरिका के बाहर नए व्यापारिक साझेदारों और बाजारों को विकसित करने की रणनीति पर जोर दे रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सरकार घरेलू आर्थिक क्षमता बढ़ाने और व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने को अपनी रणनीति का हिस्सा मानती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश दोबारा बातचीत की मेज पर लौटेंगे या टैरिफ विवाद और बढ़ेगा। अभी नई वार्ता की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है।
यदि कनाडा बड़े पैमाने पर अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाता है और अमेरिका आगे और शुल्क बढ़ाता है, तो यह विवाद एक व्यापक US-Canada trade war का रूप ले सकता है। वहीं, दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के गहरे आपसी संबंधों को देखते हुए लंबे समय तक टैरिफ बनाए रखना दोनों के लिए महंगा हो सकता है।
निष्कर्ष: अमेरिका द्वारा 50% अतिरिक्त टैरिफ लागू करना और कनाडा का “डॉलर-फॉर-डॉलर” जवाब दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में बड़ा तनाव दिखाता है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि दोनों सरकारें टकराव बढ़ाती हैं या फिर नए सिरे से बातचीत शुरू करके समझौते का रास्ता निकालती हैं।
