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कल्याण में डंपिंग पर ‘बायोमाइनिंग पैटर्न’ का उतारा; आधारवाड़ी का कचरे का पहाड़ आठ महीने में होगा जमीनदोस्त
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे के बड़े पहाड़ को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बायोमाइनिंग पद्धति के जरिए शेष करीब 6.20 लाख घनमीटर कचरे पर प्रक्रिया कर उसे अगले आठ महीनों में हटाने का लक्ष्य रखा गया है। कचरा पूरी तरह हटने के बाद आधारवाड़ी की जमीन का इस्तेमाल उद्यान और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए किए जाने की योजना है।
Priyanka Gaikwad19 अग. 2026, 10:01 AM IST

कल्याण : कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका ने विभिन्न स्थानों पर कचरा प्रक्रिया केंद्र शुरू करने के बाद आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड में वर्ष 2020 से कचरा डालना बंद कर दिया है। हालांकि, कई वर्षों से जमा कचरे का विशाल पहाड़ अब भी यहां मौजूद है। कचरे के कारण आसपास के नागरिकों को दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसलिए डंपिंग ग्राउंड को पूरी तरह हटाने की मांग लगातार की जा रही थी। महानगरपालिका ने अब इस पुराने कचरे पर बायोमाइनिंग पद्धति से प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया में पुराने कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसमें से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री अलग की जाती है। इसके बाद शेष सामग्री पर वैज्ञानिक तरीके से प्रक्रिया कर उसका उचित निपटारा किया जाता है।
आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे में से पहले चरण में करीब 6.80 लाख घनमीटर कचरे पर बायोमाइनिंग के जरिए प्रक्रिया की जा चुकी है। अब शेष करीब 6.20 लाख घनमीटर कचरे को अगले आठ महीनों में हटाने का लक्ष्य रखा गया है। कचरे का यह पहाड़ पूरी तरह हटने के बाद डंपिंग ग्राउंड की जमीन खाली हो जाएगी और वहां उद्यान विकसित करने की योजना है।
रोजाना सैकड़ों टन कचरा जमा
कल्याण-डोंबिवली शहर से रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा एकत्र किया जाता है। कचरे का वर्गीकरण करने के बाद उससे तैयार होने वाले आरडीएफ और अन्य प्रक्रिया किए गए पदार्थों को संबंधित उद्योगों को उपलब्ध कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर से रोजाना करीब 760 मीट्रिक टन कचरा एकत्र किया जाता है। इसमें से लगभग 450 मीट्रिक टन कचरे का वर्गीकरण किया जाता है, जबकि करीब 300 मीट्रिक टन कचरे का वर्गीकरण नहीं हो पाता। कचरा संग्रहण के लिए सुमित एल्को प्लास्ट संस्था की ठेका भागीदारी है। रिपोर्ट में कचरा कंपनी को मिलने वाली वार्षिक राशि करीब 84 करोड़ रुपये बताई गई है।
न्यायालयीन हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तेज
आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड को बंद करने का मामला पहले न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। वर्ष 1988 में अस्तित्व में आए इस डंपिंग ग्राउंड में लंबे समय तक कचरा डाला जाता रहा। इसके खिलाफ स्थानीय नागरिकों की ओर से लगातार विरोध किया गया न्यायालयीन आदेशों और पर्यावरणीय नियमों के चलते महानगरपालिका पर डंपिंग ग्राउंड बंद करने तथा पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने का दबाव बढ़ा। इसके बाद बायोमाइनिंग के माध्यम से पुराने कचरे को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, काम में देरी होने के कारण नागरिकों में नाराजगी भी थी। अब शेष कचरे को आठ महीनों में हटाने का लक्ष्य निर्धारित किए जाने से आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड की समस्या स्थायी रूप से हल होने की उम्मीद बढ़ गई है।
खाली जमीन पर बनेगा उद्यान
आधारवाड़ी डंपिंग ग्राउंड से कचरे का पहाड़ पूरी तरह हटने के बाद खाली होने वाली जमीन का इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं के लिए करने की योजना है। यहां उद्यान, पार्क या अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित किए जाने की संभावना है। इससे लंबे समय से डंपिंग ग्राउंड की दुर्गंध और प्रदूषण से परेशान आसपास के नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, शहर के लिए एक बड़ी कचरा प्रबंधन समस्या भी दूर हो सकती है। आधारवाड़ी का कचरे का पहाड़ पूरी तरह हटाने का काम सफलतापूर्वक पूरा होने पर कल्याण-डोंबिवली में ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। हालांकि, भविष्य में शहर में रोजाना पैदा होने वाले कचरे का प्रभावी वर्गीकरण, पुनर्चक्रण, प्रक्रिया और वैज्ञानिक तरीके से निपटारा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होगा।
