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MMRDA नहीं दे रही है सुरक्षा कर्मचारियों को पूरी तनख्वा। जाने कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण यानी एमएमआरडीए के 371 सुरक्षा गार्डों को महाराष्ट्र के श्रम कानूनों के तहत तय न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। सुरक्षा गार्डों की यूनियन ने इस संबंध में राज्य के श्रम मंत्री को एक पत्र सौंपा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन गार्डों को प्रति माह 24,000 रुपये के स्थान पर केवल 14,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं।

मुंबई: मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) में कार्यरत सुरक्षा गार्डों के वेतन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सुरक्षा गार्डों की एक प्रमुख यूनियन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्राधिकरण के अधीन काम करने वाले 371 सुरक्षा गार्डों को महाराष्ट्र के श्रम कानूनों के अनुसार तय किया गया न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।
इस मामले को लेकर यूनियन के प्रतिनिधियों ने राज्य के श्रम मंत्री से मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा। पत्र में मांग की गई है कि श्रमिकों के साथ हो रहे इस आर्थिक अन्याय को तुरंत रोका जाए।
संगठना के संस्थापक और महासचिव विद्याधर जंभोरीकर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि न्यूनतम वेतन के मौजूदा नियमों के अनुसार, इन सुरक्षा कर्मियों को हर महीने 24,000 रुपये की सैलरी मिलनी चाहिए। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही या ठेकेदारों की मनमानी के कारण उन्हें केवल 14,000 रुपये प्रति माह ही मिल पा रहे हैं।
जंभोरीकर ने कहा कि मुंबई जैसे महंगे शहर में 14,000 रुपये में घर चलाना और परिवार की जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन के बराबर है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि श्रम मंत्रालय ने इस मामले पर जल्द ही एमएमआरडीए प्रशासन को उचित आदेश जारी नहीं किए, तो सुरक्षा कर्मी अपने अधिकारों के लिए बड़े आंदोलन का रास्ता चुन सकते हैं।
यह मामला एमएमआरडीए जैसे बड़े सरकारी प्राधिकरण के लिए काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों के श्रम अधिकारों और उनके उचित मानदेय से जुड़ा है। सुरक्षा गार्ड्स की संगठना के संस्थापक और महासचिव विद्याधर जंभोरीकर के अनुसार, राज्य के नियमों और महंगाई को देखते हुए इन सुरक्षा गार्डों का मासिक वेतन कम से कम 24,000 रुपये होना चाहिए, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत के मुकाबले लगभग 10,000 रुपये कम दिए जा रहे हैं।
यह मुद्दा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा गार्ड दिन-रात काम करके सरकारी संपत्तियों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यदि कोई प्रमुख सरकारी या अर्ध-सरकारी एजेंसी ही श्रम कानूनों का ठीक से पालन नहीं करेगी, तो निजी क्षेत्रों में इसे लागू करवाना और भी कठिन हो जाएगा। यह मामला सीधे तौर पर कामगारों के बुनियादी मानवाधिकारों और आजीविका की सुरक्षा से जुड़ा है।
इसके क्या फायदे होंगे
यदि इन सुरक्षा गार्डों को नियमानुसार पूरा न्यूनतम वेतन मिलने लगता है, तो इसके कई बड़े फायदे होंगे:
371 सुरक्षा गार्डों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, जिससे वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।
बेहतर वेतन मिलने से उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और परिवार को सही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे वे अधिक मुस्तैदी और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाएंगे।
इससे समाज में श्रम कानूनों के प्रति सम्मान बढ़ेगा और अन्य विभागों में काम करने वाले ठेका श्रमिकों के अधिकारों का शोषण भी रुकेगा।
इसका एक मुख्य कारण अक्सर व्यवस्था में मौजूद ठेकेदारी प्रथा या प्रशासनिक कमियां होती हैं, जहां बिचौलिए या एजेंसियां अपने फायदे के लिए कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती कर देती हैं। काम पूरा दाम आधा क्यों का यह सवाल सीधे तौर पर व्यवस्था की जवाबदेही तय करता है कि जब काम में कोई ढील नहीं है, तो भुगतान में यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
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