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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता खतरा: 184 संदिग्ध मामलों में 35 संक्रमण की पुष्टि, 22 बच्चों की मौत से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच चांदीपुरा वायरस का संक्रमण एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर सामने आया है। राज्य में अब तक 184 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिनमें से जांच के बाद 35 बच्चों में चांदीपुरा वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं 11 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है और सभी जिलों में निगरानी, उपचार तथा रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 06:23 PM IST
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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता खतरा: 184 संदिग्ध मामलों में 35 संक्रमण की पुष्टि, 22 बच्चों की मौत से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि अब तक चांदीपुरा वायरस से जुड़े 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी संदिग्ध मामलों में वायरस की पुष्टि नहीं हुई है और केवल 35 मामले ही प्रयोगशाला जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं। वर्तमान में राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में सात संक्रमित बच्चों का इलाज चल रहा है, जबकि छह बच्चों की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में इलाज

राज्य सरकार ने गंभीर मरीजों के उपचार के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था की है। गांधीनगर, हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सिविल अस्पतालों में भर्ती बच्चों का इलाज सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमें चौबीसों घंटे मरीजों की स्थिति पर नजर रख रही हैं और आवश्यकता अनुसार आईसीयू, ऑक्सीजन तथा वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

संक्रमण किसी एक जिले तक सीमित नहीं

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चांदीपुरा वायरस के मामले राज्य के किसी एक जिले या गांव तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से मरीज सामने आने के कारण पूरे गुजरात में व्यापक निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं और संभावित संक्रमित बच्चों की पहचान के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में संक्रमण नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।

बचाव के लिए सरकार की विशेष एडवाइजरी

संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को कई महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है। कच्चे मकानों और मिट्टी की दीवारों में मौजूद दरारों को तुरंत भरने, आसपास साफ-सफाई बनाए रखने और पशुपालन वाले क्षेत्रों में नियमित रूप से कीटनाशकों का छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं। माना जाता है कि चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (बालू मक्खी) के जरिए फैलता है, इसलिए उसके प्रजनन स्थलों को नष्ट करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अस्पतालों को जारी किए गए विशेष निर्देश

राज्य सरकार ने सभी सरकारी और निजी बाल रोग अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे, बेहोशी या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, उन्हें बिना देरी किए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू में भर्ती किया जाए। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर उपचार मिलने से मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।

अभी तक नहीं है कोई वैक्सीन या विशेष दवा

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। मरीजों का उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की विशेष टीमें वायरस के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन और दवा विकसित करने के लिए अनुसंधान कर रही हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस रैब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) परिवार का एक वायरस है, जिसकी पहचान पहली बार महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में वर्ष 1965 में हुई थी। यह वायरस मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और तेज बुखार, उल्टी, दौरे, मानसिक भ्रम तथा तीव्र एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। कई मामलों में यह संक्रमण तेजी से जानलेवा भी साबित हो सकता है।

लोगों से अफवाहों से बचने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। अभिभावकों से कहा गया है कि यदि किसी बच्चे में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। सरकार ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में पूरे राज्य में स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और संक्रमण को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।