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महाराष्ट्र की सरकारी कैंटीन में अब Healthy Food
मुंबई, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र सरकार ने सभी सरकारी कैंटीन और आधिकारिक बैठकों व कार्यक्रमों में Healthy Food उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। नए मेन्यू में Millet Khichdi, Sprouts Curry, Solkadhi, मौसमी फल, पोहा और उपमा जैसे विकल्प शामिल किए जाएंगे, जबकि ज्यादा चीनी, नमक, तेल और Ultra-Processed Food को धीरे-धीरे कम किया जाएगा।

मुंबई, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी दफ्तरों और सरकारी कैंटीन में मिलने वाले खाने को ज्यादा पौष्टिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के Public Health Department ने निर्देश जारी कर सरकारी कैंटीन, सरकारी बैठकों, कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में Healthy Food और Beverages को शामिल करना जरूरी किया है। इसका उद्देश्य लोगों के खान-पान में पोषण को बढ़ावा देना और ज्यादा चीनी, नमक, तेल तथा Ultra-Processed Food के सेवन को कम करना है।
मेन्यू में शामिल होंगे हेल्दी विकल्प
नए निर्देशों के तहत सरकारी कैंटीन और आधिकारिक कार्यक्रमों में Millet Khichdi, Sprouts Curry और Solkadhi जैसे पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इसके अलावा मेन्यू तैयार करते समय मौसमी फलों, सब्जियों, दालों और पारंपरिक अनाज से बने खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सरकार की ओर से दिए गए सुझावों में पोहा, इडली-सांभर, उबले अंडे, उबली दालें, सलाद, छाछ और अन्य पौष्टिक विकल्प भी शामिल हैं। पेय पदार्थों में कम या बिना चीनी वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
ज्यादा तेल, नमक और चीनी वाले खाने में होगी कमी
सरकार के आदेश में Ultra-Processed Foods और ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता धीरे-धीरे कम करने की बात कही गई है जिनमें जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक या अस्वास्थ्यकर वसा होती है। भोजन तैयार करते समय तेल, नमक और चीनी की मात्रा को नियंत्रित रखने पर भी जोर दिया गया है। इस बदलाव का मकसद सरकारी कर्मचारियों और आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल लोगों को रोजमर्रा के खान-पान में ज्यादा पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराना है।
ICMR-NIN और FSSAI के दिशानिर्देशों का ध्यान
नया मेन्यू तैयार करते समय Indian Council of Medical Research-National Institute of Nutrition (ICMR-NIN) और Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के पोषण एवं खाद्य सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखने को कहा गया है। इससे सरकारी कैंटीन में सिर्फ स्वाद के बजाय भोजन की पोषण गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा पर भी ध्यान देने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी लागू होगा बदलाव
यह व्यवस्था केवल सरकारी कैंटीन तक सीमित नहीं रहेगी। सरकारी बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों और अन्य आधिकारिक आयोजनों में भी हेल्दी स्नैक्स और भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। नए Catering Contracts में भी इन आवश्यकताओं को शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि सरकारी कार्यक्रमों में परोसे जाने वाले खाने के चयन में भी पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों पर जोर
सरकार के सुझाए गए विकल्पों में महाराष्ट्र और देश में आम तौर पर खाए जाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों को भी जगह दी गई है। Jowar, Bajra और Nachni जैसे पारंपरिक अनाज, दालें, अंकुरित अनाज, मौसमी फल और सब्जियां इस तरह के मेन्यू का हिस्सा हो सकते हैं। सरकार का जोर ऐसे भोजन पर है जो आसानी से उपलब्ध हो, पौष्टिक हो और जिसमें अत्यधिक तेल, नमक या चीनी का इस्तेमाल न हो।
Lifestyle Diseases को लेकर बढ़ती चिंता
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब असंतुलित खान-पान और कम शारीरिक गतिविधि से जुड़ी Lifestyle Diseases को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार चिंता जताई जा रही है। स्वस्थ भोजन के विकल्प उपलब्ध कराने का उद्देश्य लोगों को बेहतर खान-पान की आदतों के प्रति जागरूक करना भी है। महाराष्ट्र सरकार के इस कदम से सरकारी संस्थानों में भोजन की गुणवत्ता और पोषण पर ज्यादा ध्यान देने की उम्मीद है। आने वाले समय में सरकारी कैंटीन और आधिकारिक कार्यक्रमों के मेन्यू में इसका असर दिखाई दे सकता है।
