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झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद के बीच सियासी वार-पलटवार, राहुल गांधी पर सुधांशु त्रिवेदी का निशाना
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर 25 जुलाई से जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने रांची के आंदोलन का हवाला देते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा और पूछा कि दूसरे छात्र आंदोलनों पर मुखर रहने वाले राहुल गांधी झारखंड के छात्रों की आवाज क्यों नहीं उठा रहे। वहीं, छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग पर कायम बताए जा रहे हैं।
Neha Sharma11 अग. 2026, 01:40 PM IST

रांची/नई दिल्ली: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। रांची में छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। सुधांशु त्रिवेदी ने रांची के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड के छात्र शांतिपूर्ण, मर्यादित और अनुशासित तरीके से अपना संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, तो राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से रांची के छात्रों की आवाज को लेकर वैसी सक्रियता क्यों नहीं दिखाई जा रही, जैसी दूसरे छात्र आंदोलनों के दौरान दिखाई गई थी।
छात्र शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से कर रहे संघर्ष
त्रिवेदी ने अपने बयान में झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों के व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में न तो गाली-गलौज हो रही है और न ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा नेता ने अपने बयान में यह भी कटाक्ष किया कि आंदोलन के दौरान छात्रों के लिए कथित तौर पर किसी अज्ञात स्रोत से भुगतान कर महंगे भोजन की व्यवस्था नहीं की जा रही है और न ही प्रदर्शन को पिकनिक जैसा माहौल दिया जा रहा है।उनकी यह टिप्पणी दरअसल उन राजनीतिक आरोपों की ओर इशारा करती है, जिनमें अलग-अलग छात्र आंदोलनों के पीछे राजनीतिक समर्थन या संसाधनों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर कोई ठोस तथ्य उनके बयान में प्रस्तुत नहीं किया गया।
मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं
सुधांशु त्रिवेदी ने झारखंड के छात्र आंदोलन को केवल पेपर लीक का मुद्दा मानने से भी इनकार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। उनके अनुसार, छात्रों की शिकायतों के पीछे सरकारी नौकरियों में कथित अनियमितता और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के साथ कथित ‘सेटिंग’ करके नौकरियां बांटने का मामला सामने आना और भी गंभीर विषय होगा। हालांकि, यह आरोप फिलहाल राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है। किसी निष्कर्ष या न्यायिक जांच के आधार पर इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता। ऐसे आरोपों की वास्तविकता जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
राहुल गांधी की चुप्पी पर उठाया सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के दूसरे हिस्सों में छात्रों के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाले राहुल गांधी को रांची के छात्रों की ‘गूंज’ क्यों सुनाई नहीं दे रही है। उन्होंने राहुल गांधी के पहले के छात्र आंदोलनों से जुड़े रुख का हवाला देते हुए कहा कि “कोटा से प्रयागराज तक दहाड़ने और चिंघाड़ने वाले आज रांची पर मिमिया भी नहीं पा रहे हैं।”अपने इस बयान के जरिए भाजपा नेता ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों को लेकर उनका रवैया मुद्दे के आधार पर बदलता है।
उद्देश्य छात्रहित नहीं, राजनीतिक स्वार्थ
त्रिवेदी ने अपने बयान के अंत में कांग्रेस की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर छात्रहित वास्तव में प्राथमिकता है, तो फिर रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों की समस्याओं को भी उसी तरह उठाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रहित से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ से जुड़ा हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ा रहा है। आंदोलनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
25 जुलाई से जारी है छात्रों का आंदोलन
रांची में छात्रों का मौजूदा आंदोलन 25 जुलाई से जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों की मांगों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच प्रमुख मुद्दे हैं। छात्रों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। सरकार की ओर से मामले में CID जांच आगे बढ़ाने और ED जांच की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, आंदोलन के दबाव के बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे की भी रिपोर्ट सामने आई है। छात्र हालांकि CBI जांच की मांग पर कायम बताए जा रहे हैं। इसी वजह से आंदोलन और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है।
आंदोलन का राजनीतिक रंग भी हुआ गहरा
छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा और भर्ती व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से विपक्ष के नेताओं की भूमिका पर पलटवार किया जा रहा है। सुधांशु त्रिवेदी का बयान इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष अलग-अलग राज्यों में छात्र मुद्दों को अपने राजनीतिक हित के अनुसार उठाता है, जबकि कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार की जवाबदेही और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अब आगे क्या?
झारखंड में छात्रों के आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है। छात्रों की सबसे बड़ी मांगों में निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा शामिल है। वहीं, राजनीतिक दल इस आंदोलन को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। ऐसे में सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला इस पूरे मामले को एक नया राजनीतिक आयाम देता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं और सरकार छात्रों की CBI जांच समेत अन्य मांगों पर आगे क्या कदम उठाती है। फिलहाल झारखंड का छात्र आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और राजनीतिक जवाबदेही—इन तीनों सवालों को एक साथ सामने ला रहा है।
