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डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में बिना सहमति नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट, रिपोर्ट फर्जी निकलने पर मचा बवाल

डोंबिवली के केडीएमसी संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और लैब कर्मियों ने परिजनों की सहमति के बिना एक नाबालिग लड़की का प्रेग्नेंसी टेस्ट कर दिया और रिपोर्ट पॉजिटिव बताकर परिवार को सूचित किया। हालांकि, परिजनों द्वारा निजी लैब में दो बार दोबारा जांच कराने पर रिपोर्ट नेगेटिव निकली। इस गंभीर लापरवाही और प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर भाजपा नेता दीपेश म्हात्रे ने पालिका आयुक्त अभिनव गोयल से शिकायत कर दोषी डॉक्टरों के निलंबन और उन पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

Khushi12 अग. 2026, 07:34 PM IST
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डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में बिना सहमति नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट, रिपोर्ट फर्जी निकलने पर मचा बवाल
डोंबिवली: डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के शास्त्रीनगर अस्पताल में परिजनों की सहमति के बिना एक नाबालिग लड़की का प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का संगीन मामला सामने आया है। सरकारी अस्पताल में पॉजिटिव आई यह रिपोर्ट जब निजी लैब में दो बार जांच कराने पर नेगेटिव निकली, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। यह मामला केवल चिकित्सीय लापरवाही का नहीं है, बल्कि मरीज के मौलिक अधिकारों और नाबालिगों के लिए निर्धारित कानूनी मेडिकल प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा है। बिना अभिभावकों की संमती के संवेदनशील जांच करने और तत्पश्चात गलत रिपोर्ट देने से पीड़ित परिवार को भारी मानसिक आघात पहुंचा है, जिसने नगर निगम की स्वास्थ्य सेवा और प्रयोगशालाओं की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शास्त्रीनगर अस्पताल के कंत्राटी डॉक्टरों और नगर निगम द्वारा नियुक्त प्रयोगशाला ने नाबालिग लड़की की जांच करने से पहले परिजनों से कोई लिखित या मौखिक सहमति नहीं ली थी। जांच प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने अचानक परिजनों को रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना दी, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया और भारी तनाव में आ गया। संदेह होने पर जब परिजनों ने निजी डॉक्टरों और प्रयोगशाला के माध्यम से दो अलग-अलग बार यह टेस्ट दोबारा कराया, तो दोनों ही बार रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई। इससे सरकारी अस्पताल की जांच प्रणाली, किट की गुणवत्ता और संबंधित डॉक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

घटना में नगर निगम की प्रशासनिक ढिलाई भी उजागर हुई है। इतना बड़ा विवाद होने के बावजूद शास्त्रीनगर अस्पताल प्रशासन ने नगर निगम की मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ल को इस घटना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी थी। भाजपा नेता दीपेश म्हात्रे ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीधे मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ल को घटना से अवगत कराया और महानगरपालिका आयुक्त अभिनव गोयल के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। दीपेश म्हात्रे ने अपने बयान में कहा, परिजनों की संमती के बिना नाबालिग की जांच करना और फिर गलत रिपोर्ट देकर परिवार को मानसिक प्रताड़ना देना बेहद संगीन मामला है। शास्त्रीनगर अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद आयुक्त अभिनव गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सादिया पिंजारी और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।